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Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी पर इन मंत्रों का करें जाप, मिलेगा जीवन की सभी परेशानियों का निवारण

Thu, 20 Nov 2025 11:09 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mokshada Ekadashi 2025: जानिए मोक्षदा एकादशी 2025 की तिथि, शुभ समय, महत्व और भगवान कृष्ण के 108 नामों का मंत्र। व्रत, पूजा विधि और मंत्र जाप से प्राप्त करें आध्यात्मिक लाभ और मोक्ष।

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Mokshada Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला

Mokshada Ekadashi 2025 Mantras: सनातन धर्म में मोक्षदा एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है। इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है और सभी व्रतों में यह श्रेष्ठ व्रत कहा गया है। मोक्षदा एकादशी का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। यही कारण है कि इस दिन व्रत, पूजा और भक्ति करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति की संभावना बढ़ती है। यह व्रत आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
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इस वर्ष मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर को मनाई जा रही है। इस दिन विशेष रूप से भगवान कृष्ण के 108 नामों का जाप अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इन नामों का उच्चारण और ध्यान करना न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि में भी सहायक होता है। भक्तजन इस दिन व्रत रखते हुए, मंत्र जाप और भगवान की स्तुति कर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं। मोक्षदा एकादशी की पूजा विधि और मंत्र जाप से जुड़ी परंपराएं हमें हमारे धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का अद्भुत अवसर प्रदान करती हैं।
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कृष्ण जी के 108 नाम - फोटो : Adobe Stock

कृष्ण जी के 108 नाम

  •  ॐ कृष्णाय नमः
  • ॐ कमलानाथाय नमः
  • ॐ वासुदेवाय नमः
  • ॐ सनातनाय नमः
  • ॐ वसुदेवात्मजाय नमः 
  • ॐ पुण्याय नमः
  • ॐ लीलामानुष विग्रहाय नमः
  • ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः
  • ॐ यशोदावत्सलाय नमः
  • ॐ हरिये नमः
  • ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदा नमः
  • ॐ शङ्खाम्बुजायुधाय नमः
  • ॐ देवकीनन्दनाय नमः
  • ॐ श्रीशाय नमः
  • ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमः
  • ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः
  • ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः
  • ॐ पूतनाजीवितहराय नमः
  • ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमः
  • ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः
  • ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः
  • ॐ नवनीतविलिप्ताङ्गाय नमः
  • ॐ नवनीतनटनाय नमः
  • ॐ मुचुकुन्दप्रसादकाय नमः
  • ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः
  • ॐ त्रिभङ्गिने नमः#
  • ॐ मधुराकृतये नमः
  • ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः
  • ॐ गोविन्दाय नमः
  • ॐ योगिनांपतये नमः
  • ॐ वत्सवाटचराय नमः
  • ॐ अनन्ताय नमः
  • ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमः
  • ॐ तृणीकृत तृणावर्ताय नमः
  • ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः
  • ॐ उत्तलोत्तालभेत्रे नमः
  • ॐ तमालश्यामलाकृतिये नमः
  • ॐ गोपगोपीश्वराय नमः
  • ॐ योगिने नमः
  • ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः
  • ॐ इलापतये नमः
  • ॐ परंज्योतिषे नमः
  • ॐ यादवेंद्राय नमः
  • ॐ यदूद्वहाय नमः
  • ॐ वनमालिने नमः
  • ॐ पीतवसने नमः
  • ॐ पारिजातापहारकाय नमः
  • ॐ गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे नमः
  • ॐ गोपालाय नमः
  • ॐ सर्वपालकाय नमः
  • ॐ अजाय नमः
  • ॐ निरञ्जनाय नमः
  • ॐ कामजनकाय नमः
  • ॐ कञ्जलोचनाय नमः
  • ॐ मधुघ्ने नमः
  • ॐ मथुरानाथाय नमः
  • ॐ द्वारकानायकाय नमः
  • ॐ बलिने नमः
  • ॐ बृन्दावनान्त सञ्चारिणे नमः
  • ॐ तुलसीदाम भूषनाय नमः
  • ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः
  • ॐ नरनारयणात्मकाय नमः
  • ॐ कुब्जा कृष्णाम्बरधराय नमः
  • ॐ मायिने नमः
  • ॐ परमपुरुषाय नमः
  • ॐ मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय नमः
  • ॐ संसारवैरिणे नमः
  • ॐ कंसारये नमः
  • ॐ मुरारये नमः
  • ॐ नाराकान्तकाय नमः
  • ॐ अनादि ब्रह्मचारिणे नमः
  • ॐ कृष्णाव्यसन कर्शकाय नमः
  • ॐ शिशुपालशिरश्छेत्रे नमः
  • ॐ दुर्योधनकुलान्तकाय नमः 
  • ॐ विदुराक्रूर वरदाय नमः
  • ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः
  • ॐ सत्यवाचे नमः
  • ॐ सत्य सङ्कल्पाय नमः
  • ॐ सत्यभामारताय नमः
  • ॐ जयिने नमः
  • ॐ सुभद्रा पूर्वजाय नमः
  • ॐ विष्णवे नमः
  • ॐ भीष्ममुक्ति प्रदायकाय नमः
  • ॐ जगद्गुरवे नमः
  • ॐ जगन्नाथाय नमः
  • ॐ वेणुनाद विशारदाय नमः
  • ॐ वृषभासुर विध्वंसिने नमः
  • ॐ बाणासुर करान्तकाय नमः
  • ॐ युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे नमः
  • ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः
  • ॐ पार्थसारथये नमः
  • ॐ अव्यक्ताय नमः
  • ॐ गीतामृत महोदधये नमः
  • ॐ कालीय फणिमाणिक्य रञ्जित श्री पदाम्बुजाय नमः
  • ॐ दामोदराय नमः
  • ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
  • ॐ दानवेन्द्र विनाशकाय नमः
  • ॐ नारायणाय नमः
  • ॐ परब्रह्मणे नमः
  • ॐ पन्नगाशन वाहनाय नमः
  • ॐ जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराकाय नमः#
  • ॐ पुण्य श्लोकाय नमः
  • ॐ तीर्थकृते नमः
  • ॐ वेदवेद्याय नमः
  • ॐ दयानिधये नमः
  • ॐ सर्वभूतात्मकाय नमः
  • ॐ सर्वग्रह रुपिणे नमः
  • ॐ परात्पराय नमः।।
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मोक्षदा एकादशी पूजन सामग्री - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी पूजन सामग्री
  • विष्णु जी की प्रतिमा या तस्वीर 
  • पीले फूल और पीले वस्त्र 
  • तुलसी के पत्ते
  • धूप, दीप, चंदन, अक्षत और रोली 
  • गंगाजल
  • घी 
  • मिठाई 

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श्री हरि के प्रिय भोग - फोटो : Adobe Stock
श्री हरि के प्रिय भोग
मोक्षदा एकादशी पर भगवान कृष्ण को अर्पित करने के लिए विशेष भोग बनाए जाते हैं। ये भोग व्रती के लिए भी पुण्यकारी माने जाते हैं।
  • पंचामृत – दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण, जिसमें तुलसी के पत्ते भी डाले जाते हैं।
  • पीली मिठाई – जैसे बेसन के लड्डू या पीले रंग की कोई भी मिठाई।
  • फल – केला, आम और मौसमी फल।
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पारण का शुभ समय - फोटो : Adobe Stock
पारण का शुभ समय
मोक्षदा एकादशी का व्रत पारण द्वादशी तिथि पर ही किया जाता है। पारण के समय व्रती चावल या अन्य अनाज ग्रहण करते हैं।
इस वर्ष मोक्षदा एकादशी का पारण 02 दिसंबर 2025 को सुबह 07:00 बजे से लेकर 09:05 बजे तक शुभ रहेगा।
इस समय के भीतर पारण करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और इसके लाभ अधिक प्राप्त होते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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