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भाद्रपद मासिक शिवरात्रि: मासिक शिवरात्रि आज, जानें शुभ मुहूर्त, योग और पूजा विधि

Wed, 09 Sep 2026 06:12 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

मासिक शिवरात्रि 2026 आज मनाई जा रही है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महादेव की कृपा पाने के खास उपाय।
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आज 9 सितंबर 2026, बुधवार को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला

Masik Shivratri 2026: आज 9 सितंबर 2026, बुधवार को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि जिस चतुर्दशी तिथि में रात्रि का समय पड़ता है, उसी दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत और भगवान शिव की रात्रिकालीन पूजा की जाती है। इस बार चतुर्दशी तिथि आज दोपहर शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहेगी, इसलिए शिवरात्रि का व्रत आज ही रखा जाएगा।

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मासिक शिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त - फोटो : Adobe Stock

मासिक शिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त
9 सितंबर 2026 को मासिक शिवरात्रि की निशिता पूजा का समय रात 11:55 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:31 बजे से 5:17 बजे तक है। इस दिन बुधवार होने के कारण अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 1:43 बजे से 3:14 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2:23 बजे से 3:13 बजे तक रहेगा। व्रत रखने वाले भक्त ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत और पूजा का संकल्प ले सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा करें।

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मासिक शिवरात्रि पर बन रहे शिव और सिद्ध योग - फोटो : Adobe Stock

मासिक शिवरात्रि पर बन रहे शिव और सिद्ध योग
इस बार मासिक शिवरात्रि पर शिव योग और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। शिव योग सुबह से लेकर रात 9:52 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान और साधना करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सिद्ध योग शुरू होगा, जिसे शुभ कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है।

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मासिक शिवरात्रि पर अश्लेषा के बाद लगेगा मघा नक्षत्र - फोटो : अमर उजाला

अश्लेषा के बाद लगेगा मघा नक्षत्र
मासिक शिवरात्रि के दिन अश्लेषा नक्षत्र सुबह से दोपहर 3:14 बजे तक रहेगा। इसके बाद मघा नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में दिन के अलग-अलग समय पर नक्षत्र का प्रभाव भी देखने को मिलेगा।

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मासिक शिवरात्रि पर भद्रा का समय - फोटो : freepik

मासिक शिवरात्रि पर भद्रा का समय
इस दिन भद्रा दोपहर 12:30 बजे से रात 11:29 बजे तक रहने की बात कही गई है। पंचांग मान्यता के अनुसार, इस दौरान भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा, इसलिए शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, भगवान शिव की पूजा और आराधना पर इसका कोई प्रतिबंध नहीं माना जाता। भक्त इस अवधि में भी श्रद्धापूर्वक शिव पूजा और मंत्र जाप कर सकते हैं।

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मासिक शिवरात्रि पर क्यों की जाती है शिव पूजा? - फोटो : AI

मासिक शिवरात्रि पर क्यों की जाती है शिव पूजा?
मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित मानी जाती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, फूल आदि अर्पित करके महादेव की पूजा करते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव के मंत्रों का जाप और शिव चालीसा का पाठ भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से शिव पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। खासतौर पर रात में शिव पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

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मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि - फोटो : AI

मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि

  • मासिक शिवरात्रि पर सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर या शिव मंदिर में जाकर पूजा करें।
  • शिवलिंग पर सबसे पहले जल या गंगाजल अर्पित करें।
  • इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दूध, पंचामृत आदि से अभिषेक किया जा सकता है।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं और भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। रात में निशिता काल के दौरान भगवान शिव की विशेषपूजा और ध्यान किया जा सकता है।
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शिव पूजा में क्या चढ़ाएं? - फोटो : अमर उजाला
शिव पूजा में क्या चढ़ाएं?
भगवान शिव की पूजा में जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, चंदन, धूप और दीप का इस्तेमाल किया जा सकता है। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें। शिवलिंग पर कोई भी सामग्री चढ़ाने से पहले स्थानीय मंदिर की परंपरा का ध्यान रखना भी उचित है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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