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देवउठनी एकादशी के दिन जाग गए हैं भगवान विष्णु, अब शुरू होंगे मंगल कार्य

Fri, 08 Nov 2019 02:08 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के विश्राम के बाद जागते हैं
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के विश्राम के बाद जागते हैं। कहते है कि इस दिन भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक राक्षस का वध किया था उसके बाद आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु ने क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर शयन किया था और चार महीने की योग निद्रा त्यागने के बाद भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन जागते है। भगवान विष्णु के जागने के बाद उनके भक्त उनकी प्रिय तुलसी उनको अर्पित करते हैं और इसी दिन भगवान विष्णु शालिग्राम के रुप में तुलसी के साथ विवाह भी करते है। आइए जानते है कि देवउठनी एकादशी के दिन 4 माह बाद उठकर भगवान विष्णु संसार की नैया को कैसे पार लगाते है।
 
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भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी से खुद को लोक कल्याण संबंधी कार्यों के लिए समर्पित कर देते हैं

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भगवान विष्णु - फोटो : ANI
देवउठनी एकादशी के दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आते हैं और खुद को लोक के कल्याण संबंधी कार्यों के लिए समर्पित कर देते हैं। भगवान विष्णु के जागने के बाद से ही संसार में विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की तरह अन्य सभी देवतागण भी योग निद्रा से जागते हैं और भगवान विष्णु समेत अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है। भगवान विष्णु इस दिन भक्तों के द्वारा किए गए दान, पुण्य आदि का भी विशेष फल देते हैं। 
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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु माता तुलसी से विवाह करते हैं

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विधि-विधान से हुआ तुलसी सालिगराम का विवाह - फोटो : अमर उजाला
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु माता तुलसी को दिए गए वचानुसार उनसे विवाह भी करते हैं। शास्त्रों के अनुसार जो लोग तुलसी-शालिग्राम विवाह कराते हैं उनके दांपत्य जीवन में हमेशा भगवान विष्णु के आशीर्वाद से प्रेम बना रहता है। जो कोई भी व्यक्ति लोभ से वशीभूत हो या मोह अधिक रखता हो यदि देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु का अभिनंदन करता है और व्रत रखता है है भगवान उसको समस्त दुखों से छुटकारा दिलाकर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर देते हैं। 

शालिग्राम के रुप में भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन भक्तों को दर्शन देते हैं

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शालिग्राम
शालिग्राम का रुप लेकर भगवान विष्णु अपने भक्तों के घर इस दिन जाते है और जो भक्त शालिग्राम की पूजा विधि-विधान से करता है उसको भगवान पुण्य का हकदार बना देते हैं। जो भक्त भगवान विष्णु को योग निद्रा से 'उठो देवा,बैठो देवा' कहकर उठाते है और प्रभु का चरणामृत ग्रहण करते है भगवान इस दिन से अपने उन भक्तों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते है और उनके जीवन के सभी कष्टों का निवारण करते हैं।

 
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भगवान विष्णु का उपदेश

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भगवान विष्णु - फोटो : vishnu
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी के कहे अनुसार थोड़े वक्त के लिए निद्रा में रहने की बात की और भक्तों को उपदेश दिया कि मेरी यह अल्पनिद्रा और योगनिद्रा मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी और इस दौरान जो भी भक्त मेरी सेवा करेंगे, मैं उनके घर माता लक्ष्मी के साथ निवास करूँगा। 
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