फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को चढ़ाना चाहते हैं बेलपत्र, जानें सही नियम

Wed, 19 Feb 2025 04:22 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Belpatra Chadhane Ke Niyam: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि को महादेव की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन शिवलिंग की पूजा करते समय बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत आवश्यक होता है। हालांकि, यदि बेलपत्र को सही तरीके से नहीं चढ़ाया गया, तो पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने का सही तरीका।
विज्ञापन
1 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : amar ujala
Maha Shivratri par Belpatra Chadhane Ki Sahi Vidhi: महाशिवरात्रि का दिन महादेव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह तिथि 26 फरवरी, 2025, बुधवार को है। इस विशेष दिन पर लोग भगवान शिव की पूजा के लिए शिवलिंग पर फल, फूल, बेलपत्र आदि अर्पित करते हैं। बेलपत्र का पूजा में विशेष धार्मिक महत्व है। इसलिए, बेलपत्र अर्पित करते समय सही विधि का पालन करना आवश्यक है, अन्यथा पूजा अधूरी मानी जा सकती है। आइए, बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
बेल पत्र के लाभ
बेल के पेड़ को सभी सिद्धियों का निवास स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि बेल के पेड़ के नीचे बैठकर किसी स्त्रोत का पाठ किया जाए, तो उसका फल अनंत गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करने से हमारे सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और भगवान शिव हमेशा अपनी कृपा हम पर बनाए रखते हैं।
विज्ञापन

3 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
बेल पत्र कब नहीं तोड़ना चाहिए?
शिवपुराण के अनुसार, कुछ विशेष दिनों में बेल पत्र तोड़ना निषिद्ध है। इनमें चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति और सोमवार शामिल हैं। यदि आपने पहले से बेल पत्र का उपयोग किया है, तो उसे धोकर पुनः चढ़ाना संभव है।

4 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
बेल पत्र कैसा होना चाहिए?
बेल पत्र हमेशा तीन पत्तों वाला होना चाहिए। तीन से कम पत्तों वाला बेल पत्र पूजा में नहीं उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, बेल पत्र का डंठल पहले से तोड़ लेना चाहिए, क्योंकि जितना छोटा डंठल होगा, उतना ही शुभ माना जाता है। बेल पत्र को हमेशा विषम संख्या में अर्पित करें, जैसे 3, 7, 11, या 21।
विज्ञापन

5 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
बेल पत्र अर्पित करने का सही तरीका
जब आप बेल पत्र भगवान शिव को अर्पित करें, तो ध्यान रखें कि उसका चिकना हिस्सा नीचे की ओर हो। इसके बाद "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं: "त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।"
विज्ञापन

6 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
कौन-सी बेल पत्र न चढ़ाएं
यह सुनिश्चित करें कि आप शिवलिंग पर कभी भी गंदे, दाग-धब्बेदार या कटी-फटी बेल पत्र न चढ़ाएं। ऐसा करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
शिवलिंग पर  बेलपत्र चढ़ाने वक्त इस बात का रखें ध्यान
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। सबसे पहले, बेलपत्र को अच्छे से धो लें। फिर, चंदन या केसर में गंगाजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और पत्तियों पर ॐ लिखें। यदि चाहें, तो आप बिना लिखे भी इसे चढ़ा सकते हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें