नर्मदा नदी के उल्टे प्रवाह की पौराणिक कथा
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लेकिन विवाह से पहले नर्मदा ने राजकुमार को देखने की इच्छा जताई और अपनी सहेली जोहिला को संदेश लेकर भेजा। जब सोनभद्र ने जोहिला को देखा, तो उन्हें नर्मदा समझकर प्रेम प्रस्ताव रख दिया। जोहिला इस प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं कर सकीं और दोनों का प्रेम संबंध बन गया।
जब नर्मदा को इस बात का पता चला, तो वे क्रोधित हो गईं और जीवनभर अविवाहित रहने का संकल्प लिया। इसी नाराजगी में उन्होंने विपरीत दिशा में बहना शुरू कर दिया और अंततः अरब सागर में जाकर मिल गईं। तभी से नर्मदा को एक कुंवारी नदी के रूप में पूजा जाता है और इसके हर कंकड़ को ‘नर्वदेश्वर शिवलिंग’ कहा जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।