Mahalaya Amavasya 2022: पंचांग के अनुसार पितृपक्ष का समापन महालया अमावस्या पर माना जाता है। पितृपक्ष महत्वपूर्ण दिन माने जाते हैं। इन दिनों में पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। पितृपक्ष पूरे 15 दिनों का होता है इसके आखिरी दिन पर अमावस्या पड़ती है। इसी अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या भी कहते हैं। अन्य शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक वर्ष इसी दिन मां दुर्गा धरती पर आती हैं। महालया से ही पश्चिम बंगाल में 10 दिवसीय वार्षिक दुर्गा पूजा उत्सव का आरंभ हो जाता है। सर्व पितृ अमावस्या इस वर्ष आज यानी 25 सितंबर, रविवार को मनाया जा रहा है। महालया अमावस्या पर लोग पवित्र नदी में स्नान करके अपने पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर उनकी विदाई के काम करते हैं पितृपक्ष और महालय अमावस्या पितरों को याद करने का दिन माना जाता है। आइए जानते हैं अमावस्या का मुहूर्त और धार्मिक महत्व।