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Rudrabhishek on Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर जरूर करें रुद्राभिषेक, शिव कृपा से मिलेगा धन-सुख

Thu, 12 Feb 2026 10:46 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:04 बजे से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा और रुद्राभिषेक का अत्यधिक महत्व है।
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Rudrabhishek On Mahashivratri - फोटो : amar ujala
Rudrabhishek On Mahashivratri: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पवित्र और अत्यंत फलदायी पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना, उपवास और रात्रि जागरण के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होकर 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। तिथि के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन 15 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
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इस शुभ अवसर पर भक्त भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। खासतौर पर महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक का अत्यंत महत्व माना गया है, जिसे करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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रुद्राभिषेक क्या है

रुद्राभिषेक क्या है?
‘अभिषेक’ का अर्थ होता है पवित्र स्नान कराना, और जब यह अभिषेक भगवान रुद्र यानी भगवान शिव को समर्पित होता है, तो उसे रुद्राभिषेक कहा जाता है। इस विधि में शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर आदि पवित्र पदार्थों से स्नान कराया जाता है। साथ ही रुद्रसूक्त, महामृत्युंजय मंत्र या “ॐ नमः शिवाय” जैसे मंत्रों का जाप किया जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आंतरिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन किया गया रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी होता है।

रुद्राभिषेक क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन किया गया रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी होता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से मन की अशांति दूर होती है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। रुद्राभिषेक के माध्यम से भक्त अपने दुख, कष्ट और नकारात्मक भावों को भगवान शिव को अर्पित करता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई यह पूजा भगवान को प्रिय होती है और वे भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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रुद्राभिषेक का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व - फोटो : मंदिर प्रशासन

रुद्राभिषेक का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में भगवान शिव को ‘रुद्र’ कहा गया है, जिसका अर्थ है दुखों का नाश करने वाला। एक प्रसिद्ध वाक्य है—“रुतम् दुखम् द्रावयति इति रुद्र:” यानी जो दुखों को दूर करे वही रुद्र है। ऐसा माना जाता है कि हमारे जीवन में आने वाली कई बाधाएं हमारे पूर्व कर्मों का परिणाम होती हैं। रुद्राभिषेक और रुद्रार्चन से इन पाप कर्मों का क्षय होता है और साधक के भीतर शिव तत्व का जागरण होता है।रुद्रहृदयोपनिषद में भी उल्लेख मिलता है कि भगवान रुद्र सभी देवताओं के मूल हैं और समस्त सृष्टि में उनका ही स्वरूप व्याप्त है। इसलिए
रुद्राभिषेक को शीघ्र फल देने वाला अनुष्ठान माना गया है। कालसर्प दोष, ग्रह पीड़ा, पारिवारिक कलह, व्यापार में हानि या शिक्षा में बाधा जैसी समस्याओं से राहत के लिए भी इसे अत्यंत प्रभावी पूजा बताया गया है।

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महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया रुद्राभिषेक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

रुद्राभिषेक से मिलने वाले लाभ

  • रुद्राभिषेक से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा कम होने लगती है और बार-बार आने वाली रुकावटों में धीरे-धीरे कमी आती है। मानसिक शांति मिलती है और आत्मबल मजबूत होता है। आर्थिक स्थिति में सुधार और करियर में स्थिरता की कामना से भी यह पूजा की जाती है।
  • स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और ग्रह दोषों की शांति के लिए भी रुद्राभिषेक लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन और पारिवारिक संबंधों में मधुरता बढ़ती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अनुष्ठान व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है और भगवान शिव की विशेष कृपा का अनुभव कराता है।
  • महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया रुद्राभिषेक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला माना जाता है, जो न केवल भौतिक बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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