फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देवभूमि में आज भी मौजूद है रावण से जुड़ी निशानियां, शिव को प्रसन्न करने के लिए किया था तप

Wed, 05 Feb 2020 03:51 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
देवभूमि उत्तराखण्ड के एक मंदिर में रावण से जुड़ी कुछ निशानियां आज भी मौजूद है। उत्तराखंड के गोपेश्वर में दशोली गढ़ के वैरासकुंड में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने तप कर अपने नौ सिरों की आहुति दी थी।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
स्कंद पुराण के केदार खंड में दसमोलेश्वर के नाम से वैरासकुंड क्षेत्र का उल्लेख किया गया है। वैरासकुंड में जिस स्थान पर रावण ने शिव की तपस्या की वह कुंड, यज्ञशाला और शिव मंदिर आज भी यहां विद्यमान है। 
विज्ञापन

3 of 5
वैरासकुंड के बारे में मान्यता है कि त्रेता युग में इसी स्थान पर रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न कर सिद्धी प्राप्ति के लिए अपने नौ सिरों की आहुति दी थी। रावण जैसे ही यज्ञकुंड में अपने दसवें सिर की आहुति देने लगा, तभी भगवान शिव प्रकट हो गए और रावण को सिर की आहुति देने से रोक लिया। 

4 of 5
इसी स्थान पर भोलेनाथ ने रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे बलशाली होने का वरदान दिया था। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस स्थान पर पौराणिक और पुरातत्व महत्व की अनेक चीजें आज भी विद्यमान हैं। कुछ समय पहले यहां खेत में खुदाई के दौरान एक अन्य कुंड मिला है, जबकि आस-पास खुदाई करने पर प्राचीन पत्थर निकलते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ऐसा कहा जाता है कि वैरासकुंड रावण की तपस्थली है। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि मान्यता है कि रावण ने चमोली जिले के वैरासकुंड में तप कर अपने नौ सिरों की यज्ञाहुति दी थी। पुराणों में भी रावण द्वारा हिमालय क्षेत्र में तप किए जाने का उल्लेख है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें