शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी का महत्व
शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी का महत्व
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी या दुर्गाष्टमी कहा जाता है। नवरात्रि के इस पावन दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। उनकी पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। महाअष्टमी पर भक्त व्रत रखते हैं और माता रानी को फल, फूल, मिठाई तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इस दिन कन्या पूजन की भी विशेष परंपरा है। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कई परिवारों में हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनाकर कन्याओं को खिलाया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को माता रानी की कृपा प्राप्त होती है।
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