पुण्यलाभ के लिए स्नान
नारदपुराण के अनुसार माघ मास में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करने से प्राणी के सभी महापातक दूर हो जाते है और प्राजापत्य-यज्ञ का फल प्राप्त होता है। 'माघ मकर गति रवि जब होई,तीरथपतिहिं आव सब कोई !!'अर्थात माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में आते हैं तब सब लोग तीर्थों के राजा प्रयाग के पावन संगम तट पर आते हैं। देवता, दैत्य ,किन्नर और मनुष्यों के समूह सब आदरपूर्वक त्रिवेणी में स्नान करते हैं ''। इस माह में किसी भी तीर्थ, नदी और समुद्र में स्नान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।