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Lunar Eclipse 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण, जानें गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी नियम

Thu, 26 Feb 2026 02:40 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Lunar Eclipse 2026 Effects on Pregnant: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह चंद्र ग्रहण सूर्य के राशि सिंह में लेगा। शास्त्रों में ग्रहण को अच्छा नहीं माना जाता है, खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए इसमें विशेष सावधानी बरतनी होती है। 
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Chandra Grahan 2026 - फोटो : अमर उजाला
3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल अत्यंत संवेदनशील समय माना जाता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए इस अवधि में सावधानी बरतना आवश्यक बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के समय वातावरण में सूक्ष्म और नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, जिसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है। इसलिए इस दौरान संयम, सतर्कता और भक्ति भाव से समय व्यतीत करना उचित माना गया है।
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चंद्र ग्रहण 2026  - फोटो : Amar Ujala
ग्रहण की क्या है पौराणिक मान्यता
पुराणों में वर्णन मिलता है कि समुद्र मंथन के समय असुर स्वर्भानु ने देवताओं का रूप धारण कर अमृत पान कर लिया था। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर अलग कर दिया। अमृत के प्रभाव से वह अमर हो गया और राहु-केतु के रूप में स्थापित हुआ। मान्यता है कि यही राहु-केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करते हैं, जिससे ग्रहण की घटना घटित होती है। इसी कारण ग्रहण काल को विशेष सावधानी का समय माना जाता है।
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- फोटो : पीटीआई
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं क्या न करें

1. नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें
धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में चाकू, कैंची, सुई या किसी भी प्रकार की नुकीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से गर्भस्थ शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका मानी जाती है।

2. घर से बाहर न निकलें
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है। खुले आकाश में जाकर चंद्रमा को देखने से भी बचना चाहिए।

3. भोजन पकाना और खाना टालें
ग्रहण काल में भोजन पकाना और ग्रहण करना वर्जित माना गया है। यदि पहले से बना हुआ भोजन हो तो उसमें तुलसी दल डालकर सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे भोजन की शुद्धता बनी रहती है, ऐसी मान्यता है।

4. सिलाई-कढ़ाई या काटने का कार्य न करें
परंपरा के अनुसार ग्रहण के समय कपड़े काटना, सिलाई करना या किसी वस्तु को छांटना शुभ नहीं माना जाता। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इन कार्यों से दूर रहना चाहिए।



 

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- फोटो : पीटीआई
ग्रहण के दौरान क्या करें
1. मंत्र जाप और भजन

ग्रहण काल में ईश्वर स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है। गर्भवती महिलाएं “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ चंद्राय नमः” या अपने इष्ट देव का मंत्र जप सकती हैं। इससे मन शांत और सकारात्मक बना रहता है।

2. धार्मिक पाठ सुनें
घर में भजन, कीर्तन या धार्मिक ग्रंथों का पाठ सुनना शुभ माना जाता है। इससे वातावरण पवित्र रहता है और भय या चिंता दूर होती है।

 
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- फोटो : पीटीआई
3. गंगाजल या तुलसी का प्रयोग
कुछ परंपराओं में गर्भवती महिला के पास गंगाजल रखना या तुलसी पत्र रखना शुभ माना गया है। यह नकारात्मक प्रभाव से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

4. ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान
ग्रहण समाप्त होने पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके साथ ही घर में गंगाजल का छिड़काव करना भी शुभ माना गया है।
धार्मिक आस्था के अनुसार ग्रहण का समय संयम, श्रद्धा और सावधानी का काल है। गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सतर्कता रखते हुए शांत और सकारात्मक वातावरण में समय बिताना चाहिए, ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित और स्वस्थ रहें।

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