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Lohri 2021: उमंग और उल्लास से भरा पर्व है लोहड़ी, जानिए इसका महत्व

Thu, 07 Jan 2021 06:04 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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लोहड़ी। - फोटो : अमर उजाला।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से ठीक एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता। यह पंजाबियों का मुख्य त्योहार है, इसकी धूम उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा बहुत ज्यादा होती है। इसके अलावा दिल्ली और अन्य राज्यों में भी लोहड़ी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। हर साल लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले यानि 13 जनवरी को मनाया जाता है। तो चलिए जानते हैं इसका महत्व और अन्य जानकारी।
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लोहड़ी - फोटो : अमर उजाला।
लोहड़ी का महत्व
इस समय मनाए जाने वाले और त्योहारो की तरह लोहड़ी का पर्व भी कृषि से जुड़ा हुआ है। इस दिन से ही मूली और गन्ने की फसल बुवाई शुरू हो जाती है और काट कर रखी गई रबी की फसल जैसे जौं, चना, मसूर, सरसों, गेहूं, मटर, मक्का आदि को लोहड़ी की अग्नि में अर्पित किया जाता है। इसका मतलब होता है कि नई फसल का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है और पूरे वर्ष अच्छी फसल, धन और संपन्नता की प्रार्थना की जाती है।
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lohri - फोटो : अमर उजाला
कैसे मनाते हैं लोहड़ी
लोहड़ी के दिन शाम के वक्त लोग एक जगह पर इकट्ठे होकर लकड़ियों व उपलों को इकट्ठा कर छोटा सा ढेर बनाकर आग जलाते हैं। इस चारों ओर चक्कर काटते हुए लोग नाचते-गाते हैं रेवड़ी, गजक, मूंगफली, खील, मक्के के दानों की आहुति देते हैं। उसके बाद गले मिलकर एक दूसरे को बधाई दी जाती है और ढोल की थाप पर सब मिलकर भांगड़ा करते हैं। सभी लोगों में लोहड़ी यानि मक्का,गजक तिल गुड़ के पकवान बांटे और खाएं जाते हैं।
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lohri
सिंधि समाज के लोग इस दिन ‘लाल लाही’ के रूप में इस पर्व को मनाते हैं। इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। यह ऋतु परिवर्तन से जुड़ा हुआ त्योहार है।इस त्योहार को शीत ऋतु के जाने और वसंत ऋतु के आगमन के तौर भी मनाया जाता है। 
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