प्रयागराज में इस समय दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन कुंभ चल रहा है। कुंभ के दौरान प्रयागराज तंबुओं के शहर में बस जाता है, जहां पर लाखों-करोड़ों लोग एकत्रित होते हैं और संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं। करीब 50 दिनों तक चलने वाले इस मेले का समापन 4 मार्च को होगा। अमर उजाला.कॉम प्रयागराज कुंभ से आयी उन तमाम तरह- तरह की बेहतरीन तस्वीरों और जानकरियों को साझा कर रहा है। आइए देखते हैं कुंभ की 25 तस्वीरें में 50 जानकारियां...
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1- कुंभ मेले को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यामिक मेला का खिताब मिला है जहां पर बिना बुलाए करोड़ों की संख्या में देश और विदेश से भक्त आते हैं।
2- कुंभ मेले के आयोजन के लिए संगम क्षेत्र में टेंट का अस्थाई शहर बसाया जाता है।
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3- धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंभ के दौरान संगम में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और मृत्यु के पश्चात देवलोक में स्थान मिलता है।
4- शाही स्नान पर मेला प्रशासन संगम तक अखाड़ों के लिए विशेष रास्तों का निर्माण किया जाता है। जिसमें केवल अखाड़ों के नागा साधु और संन्यासी ही चल सकते हैं।
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5- कुंभ मेले के आयोजन पर कई लाख लोगों को रोजगार का अवसर मिलता है।
6- शाही स्नान के दिन स्नान सुबह 3 बजे से प्रारम्भ हो जाता है। पहला स्नान साधु संन्यासी करते है, बाद में आम लोगों को स्नान करने की अनुमति मिलती है।
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7- कुंभ के एक साल पहले से आयोजन के लिए प्रशासन के सारे विभागों की अलग-अलग तैयारी और जिम्मेदारी तय हो जाती है।
8- कुंभ मेले का सफल आयोजन दुनिया के सबसे मुश्किल मैनेजमेंट में से एक है। यहां हर तरह की व्यवस्था चाक चौबंद मिलती है।
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9- प्रयागराज की आबादी करीब 12 लाख है लेकिन कुंभ के दौरान इस शहर में एक दिन में करोड़ों की संख्या में लोग एकत्रित हो जाते हैं।
10- प्रयागराज कुंभ मेला यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल है।
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11- यहां पर तीन नदियों का संगम होता है। पूरी दुनिया में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिलता है।
12- कुंभ मेले की शान नागा संन्यासी होते हैं। ये नागा संन्यासी हजारों की संख्या में कुंभ आते हैं और खत्म होने पर गायब हो जाते हैं।
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13- ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना से पहले यज्ञ के लिए धरती पर प्रयाग को चुना इसलिए इसे तीर्थराज प्रयाग भी कहा जाता है।
14- कुंभ का इतिहास सम्राट हर्षवर्धन से भी जुड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि कुंभ में वे तक तब तक दान करते थे, जब तक कि उनके पास से सब कुछ खत्म न हो जाए।
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15- ऐसा कहा जाता है कुंभ के दौरान देवी-देवता और पितरगण स्नान करते हैं जिसके कारण प्रत्येक कुंभ में नदी का जलस्तर बढ़ जाता है।
16- हर 6 साल में अर्द्धकुंभ, 12 साल में कुंभ और 144 साल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। जो केवल प्रयागराज में ही होता है।
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17- हिंदुओं के गुरू शंकराचार्य ने कुंभ में साधु-संन्यासियों को आस्था का केन्द्र बनाकर नियम बनाए थे जिसका पालन आज तक सभी 13 अखाड़े करते आ रहे हैं।
18- कुंभ के आयोजन में ज्योतिष गणना का विशेष महत्व होता है। इसमें सूर्य, गुरू,शनि और चंद्रमा जैसे ग्रहों का विशेष महत्व होता है।
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19- धार्मिक मान्यता के अनुसार महाकुंभ में स्वर्ग और पृथ्वी दोनों जगहों पर एक साथ कुंभ का आयोजन किया जाता है।
20- कुंभ का आयोजन करीब 50 दिनों तक चलता है।
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21- करीब 450 वर्ष बाद पहली बार प्रयागराज के किले में कैद अक्षयवट आम लोगों के लिए खोला गया। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रलय के समय भगवान विष्णु ने अक्षयवट पर आसन लगाकर पुन: नई सृष्टि की रचना की थी। यह वृक्ष प्रलय के समय भी नष्ट नहीं हुआ।
22- कुंभ में नागा साधु आर्कषण का केंद्र होते हैं। कुंभ में तरह-तरह के नागाओं को देखा जा सकता है।
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23- अखाड़ों के शाही अंदाज में निकलती पेशवाई को देखकर लोग दांतों तले अंगुलिया दबाने को मजबूर हो जाते हैं।
24- विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले कुंभ का आयोजन देश के 4 प्रमुख शहरों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान इन्हीं 4 स्थानों पर अमृत की बूँदे गिरी थीं।
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25- प्रयागराज के कुंभ मेले की सबसे बड़ी विशेषता यहां होने वाला कल्पवास है। लाइफ मैनेजमेंट और टाइम मैनेजमेंट के फंडे सिखाने वाले इस कल्पवास से जुड़ने को लाखों लोग देश भर से यहां पहुंचते हैं।
26 -1954 के कुंभ में मची भगदड़ के बाद, टकराव और अव्यवस्था को टालने के लिए अखाड़ा परिषद की स्थापना की गई, जिसमें सभी 13 मान्यता-प्राप्त अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि होते हैं, और आपस में समन्वय का काम इसी परिषद के जरिए होता है।
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27- इतिहासकारों की माने तो कुंभ मेले का पहला विवरण मुगलकाल के 1665 में लिखे गए गजट खुलासातु-त-तारीख में मिलता है।
28- सरकार ने अर्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ और कुंभ का नाम महाकुंभ कर दिया है।
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29- कुंभ मेला पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जमावड़ा है।
30- एक अनुमान के मुताबिक, कुंभ के आयोजन पर केंद्र और यूपी सरकार करीब 4000 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हो रहा है।
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31- नागा साधु कभी भी आम मार्ग से नहीं जाते, बल्कि देर रात घने जंगल, आदि के रास्ते से अपनी यात्रा करते हैं।
32- सभी 13 अखाड़ों में से सिर्फ 7 संन्यासी अखाड़े ही नागा साधु बनाते हैं। इनमें जूना, महानिर्वाणी, निरंजनी, अटल, अग्नि, आनंद और आवाहन अखाड़ा शामिल हैं।
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33- नागा साधुओं की दीक्षा के बाद उनकी वरीयता के आधार पर पद दिए जाते हैं। जैसे कोतवाल, बड़ा कोतवाल, महंत, सचिव आदि।
34- नागा साधुओं को शंकराचार्य की सेना कहा जाता है। सनातन परंपरा के प्रतीक माने जाने वाले इन अखाड़ों और इनसे जुड़े नागा साधुओं का वैभव कुंभ और महाकुंभ में ही देखने को मिलता है।
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35- कुंभ मेला पहले 20 वर्ग किमी में ही होता था लेकिन इस बार 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला होगा।
36- 50 करोड़ रुपये की लागत से 4 टेंट सिटी बनाई गई हैं। जिनके नाम हैं, वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट और इंद्रप्रस्थ सिटी।
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37- इस बार कुंभ मेले का थीम स्वच्छ कुंभ सुरक्षित कुंभ रखा गया है।
38- कुंभ मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू और महाशिवरात्रि के दिन खत्म होता है।
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39- कुंभ का मतलब होता है कलश। यानी समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकला अमृत कलश।
40- चीनी यात्री ने कुंभ पर किताब लिखी है, वह 617 से 647 ईसवीं तक भारत में रहे थे। उन्होंने किताब में लिखा है कि राजा हर्षवर्धन ने प्रयाग में अपना सबकुछ दान कर दिया था।
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41- इस कुंभ में 690 किमी लंबी पानी की पाइपलाइन बिछाई गई है। वहीं 800 किमी की लंबाई में बिजली की सप्लाई पहुंचाई गई है। इसके अलावा 25 हजार स्ट्रीट लाइट, 7 हजार स्वच्छता कर्मी और 20 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
42- इस कुंभ में 600 रसोईघर , 200 एटीएम, 48 मिल्क बूथ, 4 हजार हॉट-स्पॉट और 1.20 लाख बॉयो टॉयलेट की व्यवस्था भी की गई है।
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43- कल्पवासी यहां आने के बाद पूरी तरह से संन्यासियों जैसा जीवन जीने लगते हैं। दिन में 3 बार स्नान करते हैं और एक बार भोजन। बाकी का समय में पूजा-आराधना और दान दक्षिणा में समय बिताते हैं।
44- शास्त्रों में कल्पवास की दो तिथियां निर्धारित की गई है। एक मकर संक्रांति से और दूसरी पौष पूर्णिमा से। कल्पवास पूरे एक महीने का होता है।
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45- निरंजनी अखाड़े के करीब 70 फीसदी साधु-संतों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है, जिसमें डॉक्टर से लेकर प्रोफेसर, लॉ एक्सपर्ट, संस्कृत के विद्वान और आचार्य शामिल हैं।
46- कुंभ में क्रूज, वाटर स्पोर्ट्स, हेलीकॉप्टर राइड जैसे एडवेंचर और लेजर शो भी कुंभ की भव्यता में चार चांद लगा दिया है।
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47- प्रयागराज में संगम की रेती पर बसे आस्था के कुंभ से उत्तर प्रदेश सरकार को 1,200 अरब रुपये के राजस्व मिलने की उम्मीद है। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने यह अनुमान लगाया है।
48- सीआईआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 जनवरी से 4 मार्च तक आयोजित होने वाला कुंभ मेला में छह लाख से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार उत्पन्न हो रहा है।
49- कुंभ मेले में करीब 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। दुनिया का यह सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन पूरी दुनिया में अपनी आध्यात्मिकता और विलक्षणता के लिए प्रसिद्ध है।
50- कुंभ को सफल बनाने के लिए सरकार ने काफी प्रमोशन किया है।