विश्वभर में बौद्घ धर्म के संस्थापक को महात्मा बुद्घ या गौतम बुद्घ के नाम से जाना जाता है, लेकिन भारत के एक ऐसा गांव है जहां उन्हें जोगीर बाबा ने नाम से जाना जाता है और उनके इसी नाम से उस गांव का नाम जोगिया गांव पड़ गया। यह गांव है महात्मा बुद्घ के महापरिनिर्वाण स्थान कुशीनगर के पास। यहां महात्मा बुद्घ ने अपने जीवन का आखिरी उपदेश भी दिया था। यही नहीं यहां इनका एक ऐसा मंदिर भी है जहां इनकी खास प्रतिमा है।
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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में महात्मा बुद्घ ने अपने जीवन का आखिरी उपदेश दिया था और इसके बाद यहीं पर महापरिनिर्वाण हुआ। बुद्घ पूर्णिमा के मौके पर यहां करीब एक माह का मेला लगता है, जहां बौद्घ अनुयायी ही नहीं हिन्दु भी पूजा करने आते हैं।
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यहां पर महापरिनिर्वाण मंदिर में बुद्घ की खास प्रतिमा है, जो छठी सदीं में खुदाई के दौरान मिली थी। गौतम बुद्घ की छह फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा है जो हमेशा चुनरी से ढ़की रहती है। प्रतिमा का सिर्फ चेहरा ही दिखाई देता है।
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कुशीनगर में पास जोगीया जनूबी पट्टी में भी एक अति प्राचीन मंदिर है, जहां बुद्घ की बहुत पुरानी मूर्ति खंडित अवस्था में हैं। इस गांव के लोग इस मूर्ति को जोगीर बाबा कहते है।
महापरिनिर्वाण मंदिर से 1.5 किमी. दूर रामाभर स्तूप है, माना जाता है कि यह स्तूप उसी स्थान पर है जहां महात्मा बुद्घ को 483 ईसा पूर्व दफनाया गया था। प्राचीन बौद्घ लेखों में इस स्तूप को मुकुट बंधन चैत्य का नाम दिया गया है।