प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का पूरे देश में जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं और जन्माष्टमी के दिन घर-घर में इनके बाल रूप की पूजा की जाती है। इस दिन हिंदू धर्म में लोग विशेष पूजा करते हैं। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पूजा करते वक्त किस तरह की बातों का ख्याल रखना चाहिए।
पूजा करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ-साथ गौमाता की भी मूर्ति रखनी चाहिए। क्योंकि श्रीकृष्ण को गायों से बहुत प्रेम था। इसलिए जन्माष्टमी के दिन गौमाता की पूजा जरूर करें। और इस खास दिन पर गौशाला में हरी घास का दान करें। पूजा के दौरान सुंदर आसन का उपयोग करें। आसन का रंग तेज और चमकीला होना चाहिए। साथ ही कृष्ण को चढ़ाए जाने वाला वस्त्र पीले रंग का होना चाहिए।
पूजा के दौरान सबसे पहले गणेश जी की पूरे विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद श्रीकृष्ण की पूजा में आचमन करें। लड्डू गोपाल की पूजा से पहले खुद साफ हाथ से जल धोएं, इसके बाद ही श्रीकृष्ण को जल अर्पित करें। इसके लिए सुगंधित फूलों वाले जल का उपयोग करें।
श्रीकृष्ण के पैर पूजा के दौरान धोना चाहिए। पूजा से पहले पाद्य में साफ पानी और पंखुड़ियां डालें और उससे भगवान श्रीकृष्ण के चरण धोएं। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और चीनी को एक साथ मिलाकर पंचामृत बनाएं। फिर किसी शुद्ध बर्तन में भगवान को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी के बिना भोग नहीं लगाना चाहिए। दूर्वा, कुमकुम, चावल, अबीर, सुगंधित फूल और शुद्ध जल का पूजा में होना आवश्यक है।
पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र कृं कृष्णाय नम: का जाप करें। बाल गोपाल की पूजा में गाय के दूध से बने घी का उपयोग करना चाहिए। दीपक के लिए भी इसी घी का उपयोग करना चाहिए।