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इन दो मजबूरियों के कारण किन्नर बने थे भगवान श्रीकृष्ण

Thu, 22 Aug 2019 11:44 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixabay
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं अपरमपार हैं। हर कोई उनकी लीलाओं के बारे में सुनकर मंत्र-मुग्ध हो जाता है। श्रीकृष्ण की लीला से किसी ने हंसना सीखा तो किसी ने प्रेम करना सीखा। संसार में मौजूद छल, कपट और प्रपंच को हराने के लिए उन्होंने खूब सारी लीलाएं की। ऐसी ही एक लीला लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसलिए हम आपको उस लीला के बारे में बताने जा रहे हैं, जब भगवान श्रीकृष्ण ने दो बार किन्नर का रूप धारण किया था। 



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- फोटो : pixabay
भगवान श्रीकृष्ण अपने जीवन में दो बार किन्नर बने थे। एक बार उस वक्त जब वह प्यार की मजबूरी में थे। इसके अलावा धर्म की रक्षा के लिए वह दूसरी बार किन्नर बने। एक ऐसी कथा है कि एक बार देवी राधा अपने पर मान कर बैठीं। राधा जी की सखियों ने उन्हें मनाने का काफी प्रयास किया। लेकिन राधा का मान उतना ही बढ़ता जा रहा था। भगवान श्रीकृष्ण राधा से मिलना चाहते थे। लेकिन उनका मिलन नहीं हो पा रहा था। ऐसे में राधा की सखियों के सलाह पर भगवान श्रीकृष्ण ने किन्नर का रूप धारण कर लिया और अपना नाम श्यामरी रखा। 

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श्यामरी का रूप धारण करते हुए भगवान श्रीकृष्ण वीणा बजाते हुए राधा के घर के करीब आए तो राधा वीणा की स्वर से मंत्रमुग्ध होकर घर से बाहर आ गईं। श्यामरी सखी के अद्भूत रूप को देखकर राधा देखती रह गईं। राधा ने श्यामरी सखी को अपने गले का हार भेंट करना चाहा तो श्यामरी का रूप धारण किए हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि अगर देना है तो अपने मानरूप रत्न दे दो। ये हार नहीं चाहिए। राधा तुरंत समझ गईं कि ये श्यामरी नहीं श्याम हैं। 

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- फोटो : Social Media
धर्म के लिए दूसरी बार किन्नर बने कृष्ण
महाभारत युद्ध के वक्त पाण्डवों की जीत के लिए रणचंडी को प्रसन्न करना था, जिसके लिए राजकुमार की बलि देनी थी। इस दौरान अर्जुन के पुत्र इरावन ने कहा कि वह अपना बलिदान देने को तैयार है। लेकिन इरावन ने एक शर्त रख दी। शर्त यह था कि वह एक दिन के लिए विवाह करना चाहता था। एक रात के वर से विवाह के लिए कोई कन्या कैसे तैयार होती। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डवों को विजयी कराने के लिए किन्नर का रूप धारण कर लिया। 

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किन्नर का रूप धारण करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने इरावन से शादी की। अगले दिन इरावन की बली दे दी गई। इसलिए आज भी प्रतिवर्ष तमिलनाडु के कोथांदवर मंदिर में इस परंपरा को किन्नर निभाते हैं। किन्नर अपने देवता इरावन से शादी करते हैं और अगले दिन विधवा बन जाते हैं। 

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