गुरु पूर्णिमा 2019
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क्या मनुष्य अपना स्वयं ही गुरु है?
यह सिद्धांत है, कि जो दूसरे को कमजोर बनाते हैं, वह खुद ही कमजोर होते हैं। जो दूसरे को समर्थ बनाते हैं, वह खुद समर्थ होते हैं। भगवान सबसे बड़े हैं, इसलिए वे किसी को छोटा नहीं बनाते। जो भगवान के चरणों की शरण हो जाता है, वह संसार में बड़ा हो जाता है। भगवान सबको अपना मित्र या सखा बनाते हैं, अपने समान बनाते हैं, किसी को अपना चेला नहीं बनाते। जैसे, निषादराज, विभीषण, सुग्रीव, हनुमानजी, अर्जुन इत्यादि। श्रीमद्भागवत में कहा गया है 'आत्मनो गुरुरात्मैव पुरुषस्य विशेषतः' अर्थात् मनुष्य आप ही अपना गुरू है। हमारा विवेक ही हमारा गुरु है, भक्ति, ध्यान से हमारा विवेक जागृत होता, जो निरंतर बढ़ते-बढ़ते तत्त्वज्ञान में परिवर्तित हो जाता है।