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जानें आज किस पूजा से प्रसन्न होंगे प्रत्यक्ष देवता सूर्य और देंगे मनचाहा वरदान

Sun, 23 Jun 2019 10:47 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
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सूर्यदेव की पूजा के लाभ
रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। वैदिक काल से भगवान सूर्य की उपासना का उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद में सूर्य को स्थावर जंगम की आत्मा कहा जाता है। सूर्य को जीवन स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में मान्यता हैं। हमारे ऋषियों ने उदय होते हुए सूर्य को ज्ञान रूपी ईश्वर बताते हुए विशेष रूप से साधना करने को कल्याणकारी बताया है। प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है।
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देवताओं ने भी की सूर्य की उपासना

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सूर्यदेव की पूजा के लाभ
सूर्य की उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है। प्रभु श्रीराम के पूर्वज भी सूर्यवंशी थे। भगवान  श्रीकृष्ण के पुत्र सांब भी सूर्य की उपासना करके ही कुष्ठ रोग दूर कर पाए थे।
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शास्त्रों के अनुसार सूर्य पूजा का फल

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सूर्यदेव की पूजा के लाभ
भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव की साधना-आराधना का अक्षय फल मिलता है। सच्चे मन से की गई साधना से प्रसन्न होकर भगवान भास्कर अपने भक्तों को सुख-समृद्धि एवं अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। रविवार के दिन भक्ति भाव से किए गए पूजन से प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव अपने भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

ज्योतिष के अनुसार सूर्य पूजा का फल

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सूर्यदेव की पूजा के लाभ
वैदिक साहित्य में ही नहीं आयुर्वेद, ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्रों में सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नवग्रहों में प्रथम ग्रह और पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया है। जीवन से जुड़े तमाम दुखों और रोग आदि को दूर करने के साथ-साथ जिन्हें संतान नहीं होती उन्हें सूर्य साधना से लाभ होता हैं। पिता-पुत्र के संबंधों में विशेष लाभ के लिए सूर्य साधना पुत्र को करनी चाहिए।
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सूर्य उपासना के प्रमुख केंद्र

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सूर्यदेव की पूजा के लाभ
देश में सूर्य की साधना-अराधना के लिए कई मंदिर हैं। भारत के तीन सबसे प्राचीन सूर्य मंदिरों में पहला कोणार्क मंदिर, दूसरा मार्तंड मंदिर और तीसरा मोढ़ेरा मंदिर है।
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इस विधि से करें सूर्यदेव की पूजा

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सूर्यदेव की पूजा के लाभ
— सूर्योदय से पूर्व स्नान करके उगते हुए सूर्य का दर्शन एवं उन्हें 'ॐ घृणि सूर्याय नम:' कहते हुए जल अर्पित करें। 

— सूर्य की किरणों को लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें। 

— सूर्य को जल देने के पश्चात् लाल आसन में बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके इस मंत्र का 108 बार जप करें 

''एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।''


— ऐसा करने से सूर्य देवता की कृपा मिलेगी और आपको सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आपको किए गए कार्य का फल शीघ्र मिलने लगेगा और आपके अपयश दूर हो जाएंगे। साथ ही आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होगा और आप सफलता के मार्ग पर बढ़ने लगेंगे।
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