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Vinayak chaturthi 2021: इस दिन है अश्विन मास की विनायक चतुर्थी, जानिए तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और व्रत पूजा विधि

Wed, 06 Oct 2021 04:54 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
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गणपति मंदिर - फोटो : Pixabay
प्रत्येक माह भगवान गणपति के पूजन के लिए दो चतुर्थी तिथि आती हैं। कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है तो वहीं शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। भगवान गणेश के पूजन हेतु ये दोनों ही तिथियां बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। इस बार अश्वनि मास के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी 09 अक्टूबर 2021 दिन शनिवार को पड़ रही है। कई स्थानों पर विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत करके भगवान गणेश की पूजा आराधना की जाती है। तो चलिए जानते हैं विनायक चतुर्थी का महत्व व पूजा विधि।
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मासिक विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : social media
विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त-
आश्विन मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि आरंभ- 09 अक्टूबर दिन 2021 शनिवार को प्रातः 07 बजकर 48 मिनट से 
आश्विन मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि समाप्त- 10 अक्टूबर दिन 2021 रविवार को प्रातः 04 बजकर 55 मिनट पर
 
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मासिक विनायक चतुर्थी 2021
विनायक चतुर्थी महत्व-
भगवान गणेश को सभी देवों में सर्वप्रथम पूजनीय माना गया है। माह में पड़ने वाली दोनों चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित की जाती हैं इस दिन व्रत व पूजन करने से जीवन में सुख-संपन्नता व सकात्मकता का आगमन होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है इनकी कृपा से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इनकी पूजा से जातक को बुद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन से सभी विघ्नों को दूर कर उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।
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मासिक विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
पूजा विधि-
विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश का पूजन मध्यायन यानी दोपहर के समय किया जाता है परंतु फिर भी इस दिन जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करने के पश्चात लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान गणेश के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करें और व्रत का संकल्प लें। अब दोपहर के समय अपनी समार्थ्य अनुसार, सोने, चांदी, पीतल, तांबा या फिर मिट्टी की भगवान गणेश की प्रतिमा को एक चौकी पर आसन बिछाकर स्थापित करें। अब भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित करें और दीपक जलाएं। इसके बाद  'ॐ गं गणपतयै नम:' का उच्चारण करते हुए, उन्हें दूर्वा की 21 गांठे अर्पित करें। भगवान गणेश को 21 लड्डुओं का भोग लगाएं और आरती करें। आप अपनी क्षमता अनुसार भी भोग लगा सकते हैं। इनमें से पांच लड्डू ब्राह्मण को दे दें। पांच लड्डू भगवान गणेश के समक्ष रखे रहने दें बाकी के बचे हुए प्रसाद को सभी लोगों में वितरीत कर दें। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए, अथर्वशीष, गणेश स्तोत्र आदि का पाठ करें।
 
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