गंगा दशहरा के दिन लोग गंगा में स्नान करने जाते हैं। इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है।कहा जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। इसके अलावा कहा जाता है कि इस दिन जो कुछ दान आदि किया जाए उसकी संख्या 10 होनी चाहिए। दान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। आइए जानते हैं क्या है पूजा करने का शुभ मुहूर्त और कैसे करें इस दिन पूजा।
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गंगा स्नान का सबसे अच्छा समय प्रात: काल 4.15 से लेकर सुबह 5.25 बजे तक होता है। इस समय गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। इस स्नान को ऋषि स्नान भी कहा जाता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि जो लोग इस समय स्नान नहीं कर पाए हैं उन्हें यहां स्नान करने से पुण्यलाभ नहीं मिलेगा। श्रद्धालु सुबह से लेकर सूर्य अस्त तक भी स्नान करके पुण्य कमा सकते है।
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गंगा पूजन के लिए यह जरूरी नहीं कि आप गंगा में स्नान करके ही इसका फल प्राफ्त कर सकते हैं। अगर आप गंगा जी में स्नान नहीं कर पा रहे हो तो घर के पास वाली किसी भी नदी या तालाब में स्नान कर सकते हैं। अगर यह भी संभव न हो पा रहा हो तो घर में ही स्नान कर गंगा जी का ध्यान करें। अगर गंगा में स्नान कर रहे हैं तो स्नान करते वक्त नदी में 10 बार गोते लगाएं।
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ऐसी मान्यता है कि गंगा दशहरा 10 पापों का नाश करता है इसलिए इसकी पूजा करते समय 10 तरह के फूल, 10 धूप, 10 दीपक, 10 प्रकार के नैवेद्य, 10 तांबूल एवं 10 फल का प्रयोग किया जाता है।
इस दिन पूजा करते समय 10 ब्राह्मणों को 16 मुट्ठी जौ और तिल दक्षिणा में देने से लाभ मिलता है। इसके अलावा आप सत्तू का भी दान कर सकते हैं। गंगा या किसी भी पवित्र नदी का ध्यान करते हुए षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। पूजन के दैरान ‘ऊँ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:’ का जाप करना चाहिये।