खरमास को धनु संक्रांति भी कहा जाता है। खरमास उस अवधि को दर्शाता है जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करते हैं। इस अवधि में धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
Kharmas 2025: खरमास को धनु संक्रांति भी कहा जाता है। खरमास उस अवधि को दर्शाता है जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करते हैं। इस अवधि में धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खरमास के दौरान सूर्य देव की पूजा करना विशेष रूप से शुभ और फलदायी होता है। आइए जानते हैं कि 2025 में शुभ कार्य कब से शुरू किए जा सकते हैं।
शुभ कार्यों की शुरुआत
खरमास की शुरुआत रविवार, 15 दिसंबर 2024 को हुई थी, और इसका समापन मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति के दिन होगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन के बाद से सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकती है।
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खरमास 2024
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खरमास के दौरान क्या कर सकते हैं?
सूर्य देव को जल अर्पित करें: खरमास में प्रतिदिन सूर्य देव को जल चढ़ाना अत्यधिक लाभकारी माना गया है। दान-पुण्य करें: इस अवधि में दान का विशेष महत्व है। गुड़, मूंगफली, गर्म कपड़े, कंबल आदि का दान करना पुण्यकारी होता है।सकारात्मक कर्मों पर ध्यान दें: इस समय के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मकता से बचने और अच्छे कर्मों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है।
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खरमास के बाद किए जाने वाले कार्य
खरमास समाप्त होने के बाद धार्मिक और मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि आरंभ किए जा सकते हैं। इसके साथ ही नया वाहन, प्रॉपर्टी खरीदने और व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्य भी शुभ माने जाते हैं।
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सूर्य देव की पूजा विधि
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें।
तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल फूल और रोली मिलाएं।
पूर्व दिशा में मुख करके सूर्य देव को जल अर्पित करें।
जल अर्पित करते समय सूर्य की किरणों को ध्यान से देखते रहें।
इस प्रक्रिया के दौरान "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र का जप करें।
इन उपायों और पूजा पद्धति को अपनाकर खरमास के दौरान भी शुभ ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। मकर संक्रांति के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत कर जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हुआ जा सकता है।