हर तस्वीर में काली माता की जीभ क्यों होती है बाहर
काली मां की जीभ क्यों है बाहर
आपने कई तस्वीरों में देखा होगा कि मां काली की छाती पर अपने पैर रखे हुए हैं। इसके पीछे की भी एक कथा है। रक्तबीज नामक असुर को वरदान था कि वह कभी नहीं मरेगा बल्कि उसकी खून की जितनी भी बूंदें धरती पर गिरेंगी उससे अनेक रक्तबीज उत्पन्न होंगे। वरदान पाकर रक्तबीज ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दी। देवताओं ने युद्ध की ठानी और रक्तबीज से लड़ने को तैयार हो गए। लेकिन जब वह सफल नहीं हुए तब वह मां काली के पास पहुंचे। मां काली अपना वीभत्स रूप लेकर देवताओं की मदद करने के लिए युद्ध भूमि पहुंची। युद्ध के दौरान उन्होंने रक्तबीज की एक भी बूंद जमीन पर नहीं गिरने दी बल्कि अपनी जीभ को बाहर करके उसका पूरा रक्त पी लिया। रक्तबीज तो समाप्त हो गया लेकिन मां काली इतनी ज्यादा कुपित हो गईं की उन्होंने कोई भी शांत कराने में नाकाम रहा।
तब देवताओं ने भोलेनाथ से विनती कि कि वह महाकाली को शांत कराएं। भगवान शिव ने कई प्रयास किए पर वह असफल रहे। फिर भोलेनाथ काली को रोकने के लिए उनके सामने लेट गए जैसे ही गुस्से में मां काली ने अपने कदम बढ़ाए उन्हें एहसास हुआ कि वह भगवान शिव के ऊपर चरण रख रही है। यह देखकर वह शांत हुई चरण के पास जाकर लेट गए और मां काली ने देखा कि वह शिव पर कदम रख रही है। जब काली को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उसने शर्मिंदगी में अपनी जीभ बाहर निकाल ली।