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Jyestha Adhik Purnima: पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा कल, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विशेष उपाय

Sat, 30 May 2026 03:48 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Jyeshtha Adhik Purnima 2026: जानें पुरुषोत्तम मास में पड़ने वाली ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व, स्नान-दान के नियम और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाले महाउपाय।
 
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पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा - फोटो : amar ujala
Purushottam Maas Purnima: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में विराजमान रहता है, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जब पूर्णिमा तिथि पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास में पड़ती है, तब इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन व्रत, दान, स्नान और पूजा-पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होने और मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। ऐसे में आइए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और वे खास उपाय, जिन्हें करने से भगवान विष्णु और चंद्र देव की कृपा प्राप्त हो सकती है।
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कब है अधिकमास पूर्णिमा - फोटो : adobe
कब है अधिकमास पूर्णिमा 
ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा तिथि आरंभ: 30 मई 2026, शनिवार, प्रातः 11:57 बजे से  
ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा तिथि समाप्त:31 मई 2026, रविवार ,दोपहर 02:14 बजे तक 
ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का व्रत 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। 
स्नान-दान की अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी।  
चंद्रोदय समय: सायं 07:36 बजे 
 
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अधिकमास पूर्णिमा पर इस विधि से करें पूजा
अधिकमास पूर्णिमा पर इस विधि से करें पूजा 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • स्नान के लिए गंगा जल या किसी पवित्र नदी/तीर्थ का जल उपयोग करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मन को शांत रखते हुए पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
  • घर या मंदिर में भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और दीपक प्रज्वलित करें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी पत्र, चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • माता लक्ष्मी को कमल पुष्प, सुगंधित पुष्प और सफेद/लाल वस्त्र अर्पित करें।
  • इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल फलाहार ग्रहण करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जप जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • श्री हरि के सहस्रनाम या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
  • माता लक्ष्मी की आरती और विष्णु भगवान की आरती विधिवत रूप से करनी चाहिए।
  • पूजा के अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
  • संभव हो तो इस दिन दान-पुण्य जैसे अन्न, वस्त्र या धन का दान करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

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तुलसी को जल अर्पित करें और दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करें। - फोटो : Adobe Stock
अधिकमास पूर्णिमा पर करें ये उपाय 
  • ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की विशेष साधना करना शुभ माना जाता है। इसके लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • केले के वृक्ष और तुलसी माता की विधि-विधान से पूजा करें। तुलसी को जल अर्पित करें और दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी पत्र अर्पित करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। दान करते समय मन में विनम्रता और श्रद्धा रखें।
  • पीपल, वट, गूलर, केला, तुलसी, अशोक और बेल जैसे पवित्र पौधों का रोपण करें। पौधा लगाते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
  •  पूजा के अंत में भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें और आरती अवश्य करें।
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ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा का महत्व - फोटो : freepik
ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा का महत्व 
हिंदू मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि अत्यंत शुभ और पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन भगवान श्री लक्ष्मीनारायण और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। जब पूर्णिमा तिथि अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ती है, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और यह साधक के लिए अत्यधिक फलदायी मानी जाती है। इस पावन अवसर पर पवित्र जल तीर्थ में स्नान, दान और विधि-विधान से भगवान विष्णु की आराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा पूरे वर्ष भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।   
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