Janmashtami 2022: महाभारत के कई ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे। महाभारत में दुर्योधन कौरवों का बड़ा भाई था। धर्मग्रंथों के मुताबिक, दुर्योधन अधर्मी और मूर्ख था। वह अपने मामा शकुनि की बातें मानता था और उसी के बताए रास्ते पर चलता था। दुर्योधन के घमंड और जिद की वजह से महाभारत युद्ध शुरू हुआ था। माना जाता है कि दुर्योधन कलयुग का अवतार था, क्योंकि कलयुग में जन्म लेने वाले मनुष्यों के सभी गुण उसमें थे।
बताया जाता है कि कलयुग का अंश दुर्योधन में था और पुलस्त्य वंश के राक्षसों के अंश उसके भाई कौरवो में था। दुर्योधन कुटिल और क्रुर था और इसके अलावा वह युद्ध में भी माहिर था। उसने शकुनि की चाल से बलराम जी से गदा युद्ध सीख लिया था। महाभारत के युद्ध में बलराम, जरासंध और भीम के अलावा दुर्योधन को भी सर्वश्रेष्ठ गदाधारी माना जाता था। आइए जानते हैं दुर्योधन से जुड़ी कुछ रोचक बातें...
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अंतिम सांस लेते समय दुर्योधन की उठी हुई तीन उंगुलियों का राज
- फोटो : Twitter @DarkNghtUvacha
जुए में युधिष्ठिर को ऐसे हराया
शकुनी के पाशे को भगवान शिव ने वरदान दिया था कि वह इस पाशे से जुआ खेलता है, तो उसकी जीत होगी। कुटिल दुर्योधन ने इसी का फायदा उठाया। उसने युधिष्ठिर के साथ शकुनी के पाशे से जुआ खेला और छल से हराकर पांडवों से राज्य जीत लिया।
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अंतिम सांस लेते समय दुर्योधन की उठी हुई तीन उंगुलियों का राज
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आखिरी समय दुर्योधन ने क्यों उठाई तीन उंगलियां
पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, महाभारत के समय कुरूक्षेत्र में दुर्योधन अंतिम सांस ले रहा था, इसी दौरान उसने अपनी उंगलियों को उठाया था। वह बता रहा था कि उसने तीन गलतियां की थीं। अगर वह यह गलतियां नहीं करता, तो युद्ध जीत जाता। लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने उसके इस तथ्य को मानने से इंकार कर दिया।
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सबसे आखिरी में मारा गया दुर्योधन
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, महाभारत में दुर्योधन की सबसे आखिरी में मौत हुई थी। महाभारत के युद्ध में भीम और दुर्योधन के बीच लड़ाई हुई। इस युद्ध के दौरान भीम ने दुर्योधन का जंघा उखाड़कर फेंक दिया जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।
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- फोटो : iStock
अर्जुन का सौतेला भाई था दुर्योधन
दुर्योधन रिश्ते में अर्जुन का सौतेला भाई था और भगवान श्री कृष्ण का समधी था। श्री कृष्ण के पुत्र थे साम्ब जिन्होंने दुर्योधन की बेटी लक्ष्मणा से विवाह किया था।
दुर्योधन ने पांडवों को भी मारने की बहुत कोशिश की थी। उसने भीम को जहर दिया था और नदी में फिकवा दिया था, लेकिन फिर भी भीम की जान बच गई थी। पांडवों को मारने के लिए दुर्योधन ने लक्ष्यागृह बनवाया था, लेकिन पांडव बच गए। महाभारत में दुर्योधन की क्रूरता की कई कहानियां हैं।