ऐसा माना जाता है कि जो लोग रथ खींचने में सहयोग करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। बता दें, जगन्नाथ जी की रथयात्रा गुंदेचा मंदिर पहुंचकर संपन्न होती है। यह वही मंदिर' है, जहां विश्वकर्मा ने तीनों देव प्रतिमाओं का निर्माण किया था। इस मंदिर को 'गुंदेचा बाड़ी' भी कहते हैं। खास बात यह है कि इस जगह को भगवान की मौसी का घर भी माना जाता है। सूर्यास्त तक अगर रथ गुंदेचा मंदिर नहीं पहुंच पाता तो वह अगले दिन अपनी यात्रा पूरी करता है। इस मंदिर में भगवान एक हफ्ते तक रहते हैं। जहां उनकी पूजा अर्चना की जाती है।