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Temple Vastu Tips: घर के मंदिर में न रखें ये मूर्तियां, आ सकती है तरक्की में बाधा

Wed, 15 Oct 2025 01:00 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Household Deity Placement: सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर देवी-देवता की मूर्ति या तस्वीर घर के मंदिर में रखना शुभ नहीं होता। कुछ विशेष मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य का कारण बन सकती हैं।

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हर देवी-देवता की मूर्ति या तस्वीर घर के मंदिर में रखना शुभ नहीं होता। - फोटो : amar ujala
Negative Energy Home Idols: सनातन धर्म में भगवान की पूजा-अर्चना मूर्ति या चित्र रूप में करने की परंपरा बहुत पुरानी है। अधिकतर लोग अपने घरों में मंदिर बनाकर उसमें देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें स्थापित करते हैं और नियमित रूप से पूजन करते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक शांति का अनुभव होता है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र के अनुसार हर प्रकार की मूर्ति या फोटो को घर के मंदिर में रखना उचित नहीं होता। कुछ विशेष मूर्तियां या उनकी अवस्थाएं अशुभ मानी गई हैं, जो घर में संकट, अशांति और दुर्भाग्य का कारण बन सकती हैं।
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वास्तु शास्त्र के साथ-साथ गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और नारद संहिता जैसे धर्मग्रंथों में भी इन बातों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। उदाहरण के तौर पर, अग्नि पुराण के अध्याय 43 में स्पष्ट कहा गया है कि खंडित या टूटी हुई मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ये दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। यदि किसी मूर्ति में दरार आ जाए या किसी देवता की फोटो फट जाए, तो उसे तुरंत पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। साथ ही, कुछ विशिष्ट प्रकार की मूर्तियों को भी घर के मंदिर में स्थापित करना वर्जित माना गया है।
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घर में देवी का सौम्य और शांत स्वरूप ही स्थापित करना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। - फोटो : अमर उजाला
महाकाली की उग्र प्रतिमा
घर के मंदिर में माता काली के उग्र स्वरूप की प्रतिमा रखना उचित नहीं माना जाता। उनका यह रूप अत्यंत शक्तिशाली और तांत्रिक साधनाओं से जुड़ा होता है। ऐसी मूर्तियां घर के शांत वातावरण पर असर डाल सकती हैं। वास्तु और शास्त्रों के अनुसार, घर में देवी का सौम्य और शांत स्वरूप ही स्थापित करना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
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घर में इनकी मूर्ति बिना विधिपूर्वक पूजन के रखने से नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। - फोटो : instagram
काल भैरव की मूर्ति
काल भैरव, भगवान शिव का रौद्र रूप माने जाते हैं, जिनकी उपासना विशेष मंत्र और अनुष्ठानों के साथ ही की जाती है। घर में इनकी मूर्ति बिना विधिपूर्वक पूजन के रखने से नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। इसी तरह, भगवान शिव के नटराज स्वरूप को भी तांडव मुद्रा में दिखाया गया है, जिसे घर में रखना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि यह उग्र ऊर्जा का प्रतीक होता है।

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घर के मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए। - फोटो : freepik
शनिदेव की मूर्ति
शनिदेव न्यायप्रिय तो हैं, लेकिन उनकी दृष्टि क्रूर मानी जाती है। इसलिए घर के मंदिर में शनिदेव की प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए। मान्यता है कि उनकी सीधी दृष्टि परिवार के सदस्यों पर पड़ने से जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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हनुमान जी और गणेश जी की दक्षिणमुखी प्रतिमाएं घर में नहीं रखनी चाहिए। - फोटो : PTI
दक्षिणमुखी मूर्तियां
हनुमान जी और गणेश जी की दक्षिणमुखी प्रतिमाएं घर में नहीं रखनी चाहिए। दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा गया है और यह दिशा देवी-देवताओं की सौम्यता के अनुरूप नहीं मानी जाती। स्कंद पुराण के अनुसार, विशेष रूप से क्रोधित मुद्रा में विराजमान हनुमान जी की मूर्ति घर के लिए अशुभ मानी जाती है।
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घर के मंदिर में राधा और कृष्ण की अलग-अलग प्रतिमाएं नहीं रखनी चाहिए। - फोटो : instagram
राधा-कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियां
घर के मंदिर में राधा और कृष्ण की अलग-अलग प्रतिमाएं नहीं रखनी चाहिए। इन दोनों का प्रेम और एकता का प्रतीक रूप तभी प्रभावी होता है जब वे एक साथ हों। अगर इनकी मूर्तियां अलग-अलग रखी जाएं तो घर में आपसी तनाव, कलह और मतभेद बढ़ सकते हैं। नारद संहिता और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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