Holashtak Upay: हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन रंगों की होली मनाई जाती है। लेकिन इस उत्सव से ठीक पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप द्वारा अनेक कष्ट दिए गए थे। इसी वजह से ये आठ दिन शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माने जाते।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है, जिससे किसी भी मांगलिक कार्य का परिणाम अपेक्षित नहीं मिलता। इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कुछ सरल उपाय अपनाकर इस समय की नकारात्मकता को कम किया जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल होलाष्टक कब से शुरू हो रहे हैं और इस दौरान कौन से उपाय करना फलदायी होता है।