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Hariyali Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या आज , जानें स्नान-दान का समय और महत्व

Wed, 12 Aug 2026 07:41 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Amavasya 2026: सावन की अमावस्या आज यानी 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जानें हरियाली अमावस्या पर स्नान-दान का समय और इसका धार्मिक महत्व।
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हरियाली अमावस्या - फोटो : अमर उजाला
Hariyali Amavasya 2026: सावन महीने की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन स्नान-दान, पितरों का तर्पण, पूजा-पाठ और पेड़-पौधों की सेवा करने की परंपरा है। इस साल हरियाली अमावस्या की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है, क्योंकि 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के बाद अमावस्या तिथि शुरू हो रही है। ऐसे में आज यानी 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या कब मनाई जाएगी, अमावस्या तिथि का समय क्या है और स्नान-दान व पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, आइए जानते हैं इसकी पूरी जानकारी।
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हरियाली अमावस्या तिथि
हरियाली अमावस्या तिथि
साल 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 12 अगस्त की रात करीब 1:52 बजे शुरू होकर रात 11:06 बजे तक रहेगी। वहीं, 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रहने के कारण इसी दिन हरियाली अमावस्या का पर्व मनाना उचित माना जा रहा है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
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हरियाली अमावस्या 2026 का स्नान-दान
हरियाली अमावस्या 2026 का स्नान-दान कब करें?
अमावस्या के दिन स्नान और दान को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार किसी पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं। यदि नदी या तीर्थ स्थल जाना संभव न हो, तो घर पर स्नान करके भी विधि-विधान से पूजा और दान किया जा सकता है। 12 अगस्त को सूर्योदय के बाद स्नान, पूजा और दान करना शुभ माना जा सकता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अनाज या रोजमर्रा में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है। पितरों के निमित्त तर्पण करने वाले लोगों को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि का पालन करना चाहिए।

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हरियाली अमावस्या का महत्व - फोटो : AI
हरियाली अमावस्या का क्या महत्व है?
सावन अमावस्या का प्रकृति और धार्मिक परंपराओं से गहरा संबंध माना जाता है। बारिश के मौसम में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है, इसलिए इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पेड़-पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। इस दिन पूर्वजों को याद करने, उनके निमित्त तर्पण करने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा से किए गए इन कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
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हरियाली अमावस्या पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
हरियाली अमावस्या पर कौन से काम करें?
  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव और अपने इष्ट देव की पूजा-अर्चना करें।
  • परिवार की परंपरा हो तो पितरों के लिए तर्पण करें।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अनाज या जरूरी सामान दान करें।
  • पेड़-पौधे लगाएं और पहले से लगे पौधों की देखभाल करें।
  • दिन में कुछ समय ध्यान, प्रार्थना और धार्मिक कार्यों में लगाएं।
  • अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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