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Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि आज , जानें चार प्रहर पूजा का समय, जलाभिषेक मुहूर्त और पूजा विधि

Tue, 11 Aug 2026 03:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan Shivratri Jalabhishek Muhurat: सावन शिवरात्रि आज 11 अगस्त 2026 को मनाई जा रही है। इस बार भद्रा दोपहर 3:25 बजे तक रहेगी, इसलिए जलाभिषेक के शुभ समय को लेकर भक्तों में उत्सुकता है। जानें भद्रा समाप्त होने के बाद कब चढ़ाएं शिवलिंग पर जल और चार प्रहर पूजा का पूरा समय।

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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला

Sawan Shivratri 2026: आज यानी 11 अगस्त 2026, मंगलवार को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है। भगवान शिव को समर्पित इस पावन पर्व पर भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक कर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। सावन शिवरात्रि कांवड़ियों के लिए भी विशेष महत्व रखती है। कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु पवित्र गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया भी रहने वाला है। भद्रा के कारण दिन के एक हिस्से में जलाभिषेक और अन्य शुभ कार्यों को लेकर श्रद्धालुओं के मन में असमंजस है। पंचांग के अनुसार, भद्रा दोपहर तक रहेगी और इसके बाद जलाभिषेक के लिए शुभ समय शुरू होगा। आइए जानते हैं आज सावन शिवरात्रि की तिथि, भद्रा का समय, जलाभिषेक का मुहूर्त और चार प्रहर की पूजा का पूरा समय।

 

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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला

सावन शिवरात्रि तिथि 
इस साल सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4:53 बजे शुरू हुई और 12 अगस्त को रात 1:51 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर सावन शिवरात्रि का व्रत और पूजा 11 अगस्त को ही की जा रही है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं और रात में जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं।

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सावन शिवरात्रि पर लगेगी भद्रा - फोटो : अमर उजाला

सावन शिवरात्रि पर लगेगी भद्रा 
पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को भद्रा दोपहर 3:25 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए भद्रा समाप्त होने के बाद शिवलिंग का जलाभिषेक करना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। भद्रा समाप्त होने के बाद भक्त भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं। खासकर प्रदोष काल और रात्रि के चार प्रहर में शिव आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।

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सावन शिवरात्रि - फोटो : amar ujala

सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ समय

  • भद्रा दोपहर 3:25 बजे समाप्त होगी। इसके बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ माना जा सकता है। 
  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 3:45 बजे से शाम 5:25 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 6:04 बजे से रात 8:04 बजे तक
  • लाभ चौघड़िया: रात 8:25 बजे से 9:46 बजे तक
  • धार्मिक परंपरा में प्रदोष काल को भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
  • इसलिए भक्त भद्रा समाप्त होने के बाद अपनी सुविधा और स्थानीय मंदिर की पूजा व्यवस्था के अनुसार जलाभिषेक कर सकते हैं।

 

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सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा का समय - फोटो : AI

सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा का समय

  • पहला प्रहर: रात 7:04 बजे से 9:45 बजे तक
  • दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक
  • तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से 3:07 बजे तक
  • चौथा प्रहर: रात 3:07 बजे से सुबह 5:49 बजे तक
 
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सावन शिवरात्रि पर अन्य शुभ मुहूर्त - फोटो : AI
सावन शिवरात्रि पर अन्य शुभ मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:23 बजे से 6:00 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से 12:58 बजे तक
  • संध्या/गोधूलि बेला: शाम 9:13 बजे से 9:32 बजे तक
  • सिद्धि योग शाम 6:51 बजे तक रहेगा। इसके बाद व्यतिपात योग शुरू होगा।

 

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कांवड़िए कब चढ़ाएं गंगाजल? - फोटो : अमर उजाला

कांवड़िए कब चढ़ाएं गंगाजल?
सावन शिवरात्रि कांवड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व है। कांवड़ यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु शिव मंदिर पहुंचकर गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। इस बार भद्रा दोपहर 3:25 बजे तक रहने के कारण कांवड़िए इसके बाद जल चढ़ाने का समय चुन सकते हैं। शाम का प्रदोष काल भी शिव पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग शहरों और मंदिरों में पूजा की व्यवस्था अलग हो सकती है। इसलिए कांवड़ियों को स्थानीय मंदिर की व्यवस्था और स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

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सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा

सावन शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर पूजा शुरू करें। शिवलिंग पर पहले जल या गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दूध, शहद, बेलपत्र, फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जा सकती है। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। रात में जागरण और चार प्रहर की पूजा करने की भी धार्मिक परंपरा है।

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सावन शिवरात्रि पर व्रत रखने का महत्व - फोटो : adobe stock

सावन शिवरात्रि पर व्रत रखने का महत्व
सावन शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। कुछ लोग निर्जल उपवास करते हैं, जबकि कई भक्त फल, दूध और व्रत में ग्रहण किए जाने वाले सात्विक भोजन का सेवन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं वैवाहिक सुख, परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन की शांति के लिए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

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सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का धार्मिक महत्व - फोटो : adobe

सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का धार्मिक महत्व
भगवान शिव को जल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। सावन में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त को भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सावन शिवरात्रि पर कांवड़ियों द्वारा लाए गए गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना भी महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। भक्त इस दौरान भगवान शिव से सुख-शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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