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Hariyali Amavasya 2024: वृक्षों से आशीर्वाद लेने का दिन है हरियाली अमावस्या, जानें वृक्षारोपण का महत्व

Fri, 02 Aug 2024 06:23 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Amavasya 2024: नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, होम और देव पूजा एवं वृक्षारोपण आदि शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। 
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हरियाली अमावस्या - फोटो : अमर उजाला
Hariyali Amavasya 2024: प्राचीन काल से ही हमारी भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। पर्यावरण को संरक्षित करने की दृष्टि से ही पेड़-पौधों में ईश्वरीय रूप को स्थान देकर उनकी पूजा का विधान अनेक ग्रंथों में बताया गया है। हरियाली अमावस्या, वट सावित्री,अशोकाष्टमी, आंवला नवमी जैसे प्रकृति से जुड़े अनेकों पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ाते हैं। हरियाली अमावस्या का त्योहार भी धरती को हरित बनाने के प्रयासों को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व न केवल प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पुण्य की प्राप्ति, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा अर्जित करने के लिए भी लाभकारी माना गया है। 

विशेषकर इस दिन व्रत और पूजा के दौरान जल से पेड़-पौधों को सींचना और वृक्षारोपण करना अच्छा माना गया है। इसके अलावा, यह दिन पूर्वजों की पूजा और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए भी समर्पित है। नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, होम और देव पूजा एवं वृक्षारोपण आदि शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। 

धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है। कुंवारी कन्याएं इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करती हैं तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है वहीं सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष,पितृदोष और शनि का प्रकोप है वे हरियाली अमावस्या के दिन पीपल की पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक, पंचामृत या रुद्राभिषेक करें तो उन्हें लाभ होगा। इस दिन शाम के समय नदी के किनारे, वृक्षों के समीप और मंदिर में दीप दान करने का भी विधान है।

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वृक्षारोपण से जुडी धार्मिक मान्यताएं
वृक्षों को जीवन का प्रतीक मानते हुए उनकी पूजा और रोपण के माध्यम से हम पृथ्वी के साथ अपने संबंध को गहरा करते हैं और पर्यावरण को संतुलित रख सकते हैं। भविष्य पुराण में उल्लेख है कि जिसको संतान नहीं है उसके लिए वृक्ष ही संतान है। वृक्ष लगाने से वृक्ष में विद्यमान देवी-देवता पूजा करने वालों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। विधिपूर्वक वृक्ष का रोपण करने से स्वर्ग सुख प्राप्त होता है और रोपणकर्ता के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। पदम पुराण में कहा गया है कि एक पीपल का वृक्ष लगाने से मनुष्य को सैंकड़ों यज्ञ करने से भी अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

पीपल के दर्शन से पापों का नाश, स्पर्श से लक्ष्मी की प्राप्ति एवं उसकी प्रदिक्षणा करने से आयु बढ़ती है। गणेश और शिव को प्रिय शमी का वृक्ष लगाने से आरोग्य मिलता है। श्रीहरि का प्रिय वृक्ष आंवला लगाने से श्री की प्राप्ति होती है। बिल्व वृक्ष दीर्घआयु प्रदान करता है। अशोक लगाने से जीवन के शोक दूर होते हैं और सौभाग्य प्राप्ति के लिए अर्जुन, नारियल, बरगद(वट) का वृक्ष लगाएं।वहीं संतान की सुख-समृद्धि के लिए पीपल, नीम, बिल्व, गुड़हल और अश्वगंधा के वृक्ष लगाना हितकर होगा। कुशाग्र बुद्धि पाने के लिए आंकड़ा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी और तुलसी लगाना शुभ परिणाम देगा। इस दिन अन्न, वस्त्र, और धन का दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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