फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Guru Pradosh Vrat 2022: इस दिन है भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Wed, 07 Sep 2022 10:14 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
इस दिन है भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
Guru Pradosh Vrat in September 2022: भगवान भोलेनाथ को समर्पित त्रयोदशी तिथि हर महीने में दो बार पड़ती है। इस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस समय साल का छठा महीना यानी भाद्रपद चल रहा है। इस माह का दूसरा प्रदोष व्रत 08 सितंबर दिन गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार को होने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त प्रदोष व्रत रखते हैं और शुभ समय में शिव जी की पूजा करते हैं। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव शंकर के साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में खुशियां आती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और संपूर्ण पूजन विधि... 
विज्ञापन

2 of 5
इस दिन है भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
प्रदोष व्रत 2022 शुभ मुहूर्त 
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 07 सितंबर को रात में 12 बजकर 05 मिनट से होगी, जो कि 08 सितंबर, गुरुवार की रात लगभग 9 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 08 सितंबर को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 
विज्ञापन

3 of 5
इस दिन है भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
गुरु प्रदोष व्रत के दिन सुबह उठकर स्नानादि करने के बाद शिव जी के सामने दीपक प्रज्वलित कर प्रदोष व्रत का संकल्प लें। संध्या समय शुभ मुहूर्त में पूजन आरंभ करें। गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें। फिर विधिपूर्वक पूजन करें। 

4 of 5
इस दिन है भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
प्रदोष व्रत का महत्व
कहा जाता है कि इस व्रत को करने से रोग, ग्रह दोष, कष्ट, पाप आदि से मुक्ति मिलती है। साथ ही इस व्रत के पुण्य प्रभाव से नि:संतान लोगों को पुत्र भी प्राप्त होता है। शिव जी की कृपा से धन, धान्य, सुख, समृद्धि से जीवन परिपूर्ण होता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
इस दिन है भाद्रपद माह का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व - फोटो : istock
गुरु प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, वृत्तासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया। जब अुसरों की सेना हारने लगी तो वृत्तासुर ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिसे देखकर देवता डर गए और देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचें। देवगुरु ने उन्हें बताया कि “वृत्तासुर पूर्व जन्म में राजा चित्ररथ था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। एक दिन उससे कुछ भूल हो गई, जिसकी वजह से देवी पार्वती ने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया। तब से वह वृत्तासुर बन गया। बृहस्पति देव ने बताया कि वो आज भी शिव जी का परम भक्त है। यदि आप सभी गुरु प्रदोष व्रत को नियमपूर्वक करें, तो वृत्तासुर को हरा सकते हैं। देवताओं ने ऐसा ही किया और वृत्तासुर को परास्त कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें