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Parivartini Ekadashi 2022: परिवर्तिनी एकादशी आज, जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और संपूर्ण पूजा विधि

Tue, 06 Sep 2022 03:43 PM IST
आशिकी पटेल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत महत्व और पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
Parivartini Ekadashi 2022: आज यानी 06 सितंबर को एकादशी व्रत है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी, पद्मा एकादशी और डोल ग्यारस भी कहते हैं। इस एकादशी व्रत के दौरान भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना होती है। परिवर्तिनी एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी या जलझूलनी एकादशी पर व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता है। साथ ही सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। कहा जाता है कि चतुर्मास के दौरान पाताल लोक में क्षीर निंद्रा में वास कर रहे भगवान विष्णु इसी दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी है। आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी की शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि के बारे में... 
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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत महत्व और पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
परिवर्तिनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त
  • एकादशी तिथि प्रारंभ- 06 सितंबर 2022, मंगलवार, प्रातः 05 बजकर 54 मिनट से  
  • एकादशी तिथि समाप्त- सितंबर 07, 2022, बुधवार प्रातः 03 बजकर 04 मिनट पर 
  • परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण का समय- 8 सितंबर, गुरुवार, प्रातः 06 बजकर 02 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट तक  
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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत महत्व और पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
परिवर्तिनी एकादशी 2022 मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 06 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी व्रत के दिन सुबह से ही आयुष्मान योग लग रहा है, जो सुबह 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से सौभाग्य योग लगेगा। इसके अलावा परिवर्तिनी एकादशी के दिन त्रिपुष्कर योग और रवि योग भी बन रहे हैं। ऐसे में इस बार परिवर्तिनी एकादशी पूजा के लिए बेहद शुभ है। 

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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत महत्व और पूजा विधि - फोटो : istock
व्रत और पूजा विधि
परिवर्तिनी एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान वामन की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। फिर भगवान वामन की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान वामन की पूजा विधि-विधान से करें। सबसे पहले भगवान वामन को पंचामृत से स्नान कराएं। फिर वामन देव को पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें और भगवान वामन की कथा सुनें। साथ ही द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत महत्व और पूजा विधि - फोटो : istock
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व 
कहा जाता है कि इस एकादशी व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं इस व्रत का माहात्म्य युधिष्ठिर को बताया है। मान्यता है कि जो भक्त ये व्रत को करते हैं, उन्हें ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों में पूजन का फल प्राप्त होता है।
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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत महत्व और पूजा विधि - फोटो : iStock
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में बलि नामक एक असुर राजा था। असुर होने के बावजूद भी वह महादानी और भगवान श्री विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था।वैदिक विधियों के साथ वह भगवान का नित्य पूजन किया करता था। उसके द्वार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। कहा जाता है कि अपने वामनावतार में भगवान विष्णु ने राजा बलि की परीक्षा ली थी। राजा बलि ने तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया था लेकिन उसमें एक गुण यह था कि वह किसी भी ब्राह्मण को खाली हाथ नहीं भेजता था उसे दान अवश्य देता था। दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने उसे भगवान विष्णु की लीला से अवगत भी करवाया, लेकिन फिर भी राजा बलि ने वामन स्वरूप भगवान विष्णु को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया। फिर क्या था दो पगों में ही भगवान विष्णु ने समस्त लोकों को नाप दिया तीसरे पग के लिये कुछ नहीं बचा तो बलि ने अपना वचन पूरा करते हुए अपना शीष उनके पग के नीचे कर दिया। भगवान विष्णु की कृपा से बलि पाताल लोक में रहने लगा, लेकिन साथ ही उसने भगवान विष्णु को भी अपने यहां रहने के लिये वचनबद्ध कर लिया था। मान्यता है कि वामन अवतार की इस कथा को सुनने और पढ़ने वाला व्यक्ति तीनों लोकों में पूजित होता है। 
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