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Garuda Purana: दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखना चाहिए? जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

Sat, 10 Jul 2021 06:40 PM IST
संकल्प सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
गरुड़ पुराण हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों में से एक है। इस पुराण में उन रहस्यमयी बातों का जिक्र किया गया है, जो कि हमारे भौतिक जगत से इतर एक अलग आयाम में घटित होती हैं। इस पुराण को 18 महापुराण में से एक माना जाता है। मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? आत्मा कैसे नया गर्भ धारण करती है? इन सब बातों का उल्लेख हमें इस पुराण में देखने को मिलता है। पुराण में कहा गया है कि आत्मा नश्वर है। वह कभी भी नष्ट नहीं होती। व्यक्ति की मौत के बाद आत्मा सूक्ष्म शरीर धारण कर लेती है। इसके बाद वह अपने किए गए पाप या पुण्य के कर्मों को अन्य लोकों में जाकर भोगती है। इस पुराण में कहा गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने शरीर को जलते हुए देखती है। उसका मोह अपने शरीर के प्रति खत्म नहीं होता। ऐसे में गरुड़ पुराण के मुताबिक दाह संस्कार करके घर लौटते वक्त व्यक्ति को पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। आइए जानते हैं इसके पीछे की क्या वजह है?
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गरुड़
गरुड़ पुराण के मुताबिक शरीर के दाह संस्कार के बाद भी आत्मा का लगाव अपने सगे संबंधियों के प्रति होता है। आत्मा किसी तरह दोबारा उनके पास जाना चाहती है। इस कारण दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखने पर आत्मा को महसूस होता है कि उसके साथ अभी भी आपका लगाव है। इस कारण वह मोह में बंध जाती है और उससे निकल पाना उसके लिए आसान नहीं होता।  
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भगवान विष्णु - फोटो : ANI
यही एक वजह है, जिसके चलते शव के दाह संस्कार के बाद कोई भी व्यक्ति पीछे मुड़कर नहीं देखता है। इससे आत्मा को यह संदेश दिया जाता है कि अब उसे मोह बंधन से मुक्त होकर आगे के रास्ते का सफर करना चाहिए।

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भगवान विष्णु - फोटो : Social media
गरुड़ पुराण के अनुसार शरीर के जलने के बाद आत्मा अपने सगे संबंधियों के पीछे-पीछे आने लगती है। उसे दूसरे शरीर की आकांक्षा होती है। यदि आप इस दौरान पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आत्मा को लगता है कि आपके अंदर उसके लिए मोह है और वह ऐसे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर लेती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
शरीर में प्रवेश करने के बाद आत्मा ऐसे लोगों को खूब सताती है। दाह संस्कार के बाद ये आत्माएं ज्यादातर छोटे बच्चों और कमजोर दिल के लोगों के शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करती हैं। इस कारण छोटे बच्चों या कमजोर दिल के लोगों को श्मशान पर नहीं ले जाना चाहिए। अगर इन्हें ले जाया भी जा रहा है तो लौटते वक्त इन्हें सबसे आगे की ओर रखना चाहिए।
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