फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ganesh Chaturthi 2022: भगवान गणेश से जुड़ी हैं कई मान्यताएं, सवाल-जवाब से जानिए हर एक की जानकारी

Wed, 31 Aug 2022 05:04 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 9
Ganesh Chaturthi 2022 - फोटो : अमर उजाला
आज विध्नहर्ता, वक्रतुण्ड, गजकर्णक, बुद्धिविधाता और लंबोदर भगवान गणेश घर-घर पधार रहे हैं। 31 अगस्त 2022 से 09 सितंबर तक भगवान गणपति आपके घर विराजेंगे। विघ्नहर्ता और गौरीपुत्र भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना और पूजा-आराधना की तैयारियां पूरी हो चुकी है। वैदिक पंचांग के अनुसार भगवान गणेश का जन्मोत्सव भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मध्याह्र काल में हुआ था इसलिए आज गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे। सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 01 बजकर 20 मिनट तक गणपति की स्थापना के लिए के सबसे अच्छ समय रहेगा। भगवान गणेश का स्वरूप और उनका जीवन बहुत ही निराला और सीख प्रदान करने वाला है। गणपति के स्वरूप में सफल, सुखी और शांति भरे जीवन जीने कई सूत्र छिपे हुए हैं। गणेशोत्सव के मौके पर आज हम आपको भगवान गणेश और उनकी पूजा से जुड़े तमाम सवाल के जवाब देंगे। जैसे सबसे पहले गणेश पूजन क्यों होती है? भगवान गणेश की सिद्धिदाता क्यों कहा जाता है? गणेश जी को दूर्वा अतिप्रिय क्यों हैं? गणेश जी को मोदक क्यों प्रिय है और उनका एक दांत टूटा हुआ क्यों हैं? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब।
विज्ञापन

2 of 9
गणपति मंदिर - फोटो : Pixabay

सवाल - भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता क्यों माना गया है?

जवाब-  भगवान शिव के द्वारा मिले वरदान के कारण भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है।  इसके अलावा भगवान गणेश जल तत्व के देवता हैं और सभी देवी-देवताओं का इसमें वास माना गया है। जलतत्व के अधिपति देवता होने के कारण प्रथम पूज्य हैं। सृष्टि में सबसे पहले चारो तरफ जल ही जल था। इसके अलावा शिवपुराण में वर्णन है कि जब भगवान गणेश माता पार्वती के द्वारपाल की भूमिका में थे,तब भगवान शिव क्रोध में आकर गणेशजी का सिर काट दिया था। माता पार्वती के क्रोध में आने के बाद शिवजी ने भगवान गणेश के शरीर में हाथी के बच्चे का सिर जोड़ दिया था। भगवान गणेश के इस रूप में उनकी कैसी पूजा होगी? तब माता पार्वती के इस सवाल पर भगवान शिव ने वरदान दिया कि सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होगी। मान्यता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और आने वाले सभी विघ्नों को दूर कर देते हैं। 
विज्ञापन

3 of 9
Ganesh Chaturthi 2022

सवाल- शुभ कार्य में सबसे पहले श्री गणेशाय नम:क्यों लिखा जाता है?

जवाब- क्योंकि भगवान गणेश गणों के अधिपति देवता हैं और अक्षरों को गण कहा जाता है। इसी वजह से भगवान को गणेश और गजानन भी कहा जाता है।  व्याकरण में भी गण शब्द आता है। गण के अधिष्ठाता देवता होने के कारण इन्हें भगवान गणेश कहा गया है। ऐसे में किसी भी तरह का शुभ कार्य शुरू करने से पहले जैसे विद्यारंभ, गृह प्रवेश, विवाह, धार्मिक अनुष्ठान और लेखन करने से पहले श्री गणेशाय नम: लिखा जाता है। ताकि शुभ कार्य या लेखन में कोई बाधा न आने पाए।
 

4 of 9
गणेश चतुर्थी 2022 की बधाई - फोटो : Amar Ujala

सवाल - भगवान गणेश को सिद्धिदाता क्यों कहा जाता है ?

जवाब- क्योंकि बिना सिद्धि प्राप्ति किए कोई भी कार्य संपन्न नहीं हो सकता। सिद्धि श्रद्धा और विश्वास से बना हुआ है। हिंदू धर्म में भगवान शिव को विश्वास और माता पार्वती को श्रद्धा का प्रतीक और रूप माना गया है। किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए श्रद्धा और विश्वास का होना बहुत ही जरूरी होता है। जहां पर श्रद्धा का भाव नहीं होता वहां आत्मविश्वास नहीं पैदा हो सकता और जहां विश्वास नहीं होता वहां श्रद्धा का भाव नहीं आ सकता। ऐसे में अगर कोई शुभ संकल्प के साथ कार्य की शुरुआत की जाए तो उसमें श्रद्धा और विश्वास दोनों का होना जरूरी होता है। 
विज्ञापन

5 of 9
ganesh chaturthi 2022

सवाल - गणेश जी कलाओं के देवता क्यों?

जवाब- क्योंकि भगवान गणेश और माता सरस्वती संयुक्त रूप से सभी कलाओं में दक्ष और निपुण हैं। गणेश जी नृत्य, वादन, लेखन, वाणी, तर्क,विचार और बुद्धि के देवता हैं। 
विज्ञापन

6 of 9
ganesh chaturthi 2022 - फोटो : अमर उजाला

सवाल - भगवान गणेश को मंगलमूर्ति क्यों कहा गया है?

जवाब- इसके पीछे का कारण ये है कि भगवान गणेश विध्नहर्ता, समृद्धिदाता, वैभव दाता, मुहूर्त और शुभ लाभ के देवता हैं। श्रीगणेश लोक मंगल के देवता हैं,जहां पर कुछ भी अमंगल होता है उसे दूर करने के लिए श्री गणेश अग्रणी रहते हैं। गणेश जी रिद्धि और सिद्धी के स्वामी हैं । इसलिए इनकी कृपा और आशीर्वाद से वैभव, संपदा और समृद्धि का कभी अभाव नहीं रहता है। भगवान गणेश की दोनों पत्नियां रिद्धि और सिद्धि सुख,संपन्नता और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। भगवान गणेश के पुत्र शुभ और लाभ है जो समृद्धि प्रदान करते हैं। स्वयं भगवान गणेश विध्नहर्ता और मंगलमूर्ति हैं। जहां गणपति है वहां पर संपन्नता आती है और बाधाएं दूर होती हैं। ज्योतिष में भगवान गणेश को सभी 27 नक्षत्रों का स्वामी माना गया है। कोई भी मांगलिक कार्य शुभ मुहू्र्त और गणपति की सर्वप्रथम पूजन के साथ ही किए जाते हैं।
विज्ञापन

7 of 9
ganesh chaturthi 2022 - फोटो : अमर उजाला

सवाल- गणेश प्रतिमाओं में कुछ की सूंड बाईं ओर तो कुछ की दाईं ओर ऐसा क्यों? 

जवाब- क्योंकि भगवान गणेश की दाईं ओर सूंड वाली मूर्ति सिद्धि विनायक और बाईं ओर वाली विध्न विनाशक मानी जाती है।  गणेश पुराण के अनुसार जब किसी गणेश प्रतिमा में भगवान गणेश की सूंड दाईं ओर होती है तो उसे सिद्धि विनायक का स्वरूप माना जाता है,वहीं बाईं ओर की सूंड वाली मूर्ति को विध्न विनाशक का स्वरूप माना जाता है। सिद्धिविनायक गणेश मूर्ति को घर के अंदर स्थापित की जाती है जबकि विध्न विनाशक गणेश मूर्ति को घर के बाहर स्थापित करने की प्रथा होती है। घर के बाहर विध्न विनाशक गणेश प्रतिमा होने पर नकारात्मक ऊर्जाएं घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा भगवान गणेश की दाईं सूंड वाली मूर्ति सूर्य की मानी जाती है और बाईं सूंड वाली गणेश प्रतिमा चंद्रमा का प्रतीक होती है।

8 of 9
ganesh chaturthi 2022 - फोटो : अमर उजाला

सवाल- भगवान गणेश विशालकाय गज जबकि वाहन आखिर चूहा ही क्यों?

जवाब- क्योंकि भगवान गणेश बुद्धि,विद्या, वाणी, तर्क-वितर्क के अधिपति देवता हैं। यानी गज सुबद्धि जबकि मूषक कुबुद्धि का प्रतीक है। सभी जीव जंतुओं में गजराज को सबसे बुद्धिमान और तेज दिमाग वाला प्राणी माना गया है। इसलिए जब भगवान शिव ने बाल गणेश का सिर काटा था,फिर इसके बाद उन्होंने हाथी के बच्चे का सिर का चुनाव बाल गणेश की लिए किया था। प्राणियों और इंसानों के बीच समानता के लिए गणेशजी को हाथी के मुख का दिखाया गया है, वहीं मूषक में हमेशा चीजों को कुतरने का गुण होता है। मूषक में अच्छी-बुरी और काम की चीजों व बेकार की चीजों में अंतर नहीं समझ पाता है। इसी कारण से चूहा कुतर्क बुद्धि का प्रतीक है। सुबद्धि हमेशा कुबुद्धि पर भारी ही रहता है।
विज्ञापन

9 of 9
ganesh chaturthi 2022 - फोटो : अमर उजाला

सवाल- घर के मुख्य दरवाजे और वाहनों में गणेश जी प्रतिमा क्यों लगाई जाती है।

जबाब- क्योंकि भगवान गणेश सभी प्रकार की विपत्तियों से रक्षा करते हैं। भगवान गणेश शुभंकर और दिशाओं के देवता हैं।  गणेश जी विध्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं। यह सभी तरह अमंगल को फौरन ही दूर कर देते हैं। इस कारण से किसी भी तरह के अमंगल से बचने के लिए लोग मुख्य दरवाजे और वाहनों में गणेश जी की मूर्ति को लगाते हैं। गणेश जी सभी दिशाओं के स्वामी होने के कारण इनका नियंत्रण हर दिशा में होता है। स्वस्तिक और ऊं की तरह ही गणेश की प्रतिमा शुभंकर, विध्नहर्ता और रक्षक है। सनातन धर्म में ओम,स्वस्तिक और गणेशजी को शुंभकर माना गया है। गणेश जी हमेशा आने वाले संकटों से भक्तों की रक्षा करते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें