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Dussehra 2026: दशहरे से पहले घर में लगाएं ये 4 शुभ पौधे, वास्तु के अनुसार सुख-समृद्धि से जुड़ी हैं मान्यताएं

Thu, 15 Oct 2026 01:01 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

दशहरा 2026 का पर्व 20 अक्तूबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे से पहले घर में कुछ शुभ पौधे लगाना सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं शमी, तुलसी, अपराजिता और केले के पौधे का धार्मिक महत्व और इन्हें लगाने से जुड़ी खास बातें।

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dussehra 2026 - फोटो : amar ujala

सनातन धर्म में दशहरे यानी विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की शक्ति की आराधना से जुड़ा है। धार्मिक परंपराओं में इस अवसर पर पूजा-पाठ करने के साथ कुछ शुभ पौधों का पूजन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी, तुलसी, अपराजिता और केले जैसे पौधों को शुभता, सकारात्मकता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में दशहरे से पहले आप भी अपने घर या बगीचे में इन पौधों को लगाने पर विचार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन चार पौधों का धार्मिक महत्व और इन्हें लगाने से जुड़ी जरूरी बातें।

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दशहरे के अवसर पर शमी के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। - फोटो : Amar Ujala

शमी का पौधा
दशहरे के अवसर पर शमी के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं में शमी वृक्ष का संबंध भगवान श्रीराम और महाभारत काल के पांडवों से भी जोड़ा जाता है। कई क्षेत्रों में विजयादशमी के दिन शमी के पत्तों का पूजन करने और उन्हें शुभता के प्रतीक के रूप में बांटने की परंपरा है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में शमी के पौधे को सुख-समृद्धि और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है। यदि आप इसे घर में लगाना चाहते हैं, तो ऐसी जगह चुनें जहां पर्याप्त धूप आती हो और पौधे को बढ़ने के लिए उचित स्थान मिले। इसकी नियमित देखभाल करना भी जरूरी है।

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हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्र और पूजनीय पौधा माना जाता है। - फोटो : AI Generated

तुलसी का पौधा
हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्र और पूजनीय पौधा माना जाता है। अनेक घरों में तुलसी की नियमित पूजा की जाती है और शाम के समय दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से है और इसे घर की सुख-शांति तथा मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। दशहरे से पहले घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहते हैं, तो इसके लिए ऐसी जगह चुनें जहां पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिलती हो। तुलसी के पौधे को जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए और गमले में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए। इससे पौधा स्वस्थ बना रह सकता है।

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अपराजिता अपने आकर्षक नीले या सफेद फूलों के लिए पहचानी जाती है। - फोटो : adobe stock

अपराजिता का पौधा
अपराजिता अपने आकर्षक नीले या सफेद फूलों के लिए पहचानी जाती है। धार्मिक परंपराओं में इसके फूलों का इस्तेमाल पूजा-पाठ में किया जाता है। विजयादशमी के साथ भी अपराजिता के पौधे का संबंध कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में देखने को मिलता है। इसके नाम को विजय और सफलता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। मान्यता है कि दशहरे के अवसर पर अपराजिता का पूजन करना शुभ होता है। आप इस पौधे को घर के बगीचे या गमले में लगा सकते हैं। इसे अच्छी रोशनी और चढ़ने के लिए सहारे की जरूरत पड़ सकती है। उचित देखभाल से यह पौधा अच्छी तरह विकसित होता है और अपने सुंदर फूलों से घर की शोभा बढ़ाता है।

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धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में इसके पत्तों का उपयोग किया जाता है।

केले का पौधा
केले के पौधे को हिंदू धर्म में शुभ माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों में इसके पत्तों का उपयोग किया जाता है। केले के पौधे का संबंध भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा से भी जोड़ा जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में इसे सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है। यदि आपके घर में पर्याप्त खुली जगह है, तो केले का पौधा बगीचे में लगाया जा सकता है। इसे अच्छी धूप, पर्याप्त पानी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसकी जड़ों और पत्तों को फैलने के लिए भी पर्याप्त जगह चाहिए। इसलिए पौधा लगाने से पहले स्थान का चुनाव सोच-समझकर करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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