शारदीय नवरात्रि 2026
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षोडश मातृका कौन हैं और इनकी पूजा क्यों होती है?
अष्टमातृकाओं की तरह षोडश मातृका की उपासना भी हिंदू धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। षोडश का अर्थ सोलह होता है, इसलिए इस परंपरा में सोलह मातृशक्तियों की पूजा की जाती है। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, क्षेत्रों और अनुष्ठान पद्धतियों में इनके नामों तथा क्रम में अंतर मिल सकता है। कुछ प्रचलित सूचियों में गौरी, पद्मा, शची, मेधा, सावित्री, विजय, जया, देवसेना, स्वधा, स्वाहा, शांति, पुष्टि, धृति और तुष्टि जैसी शक्तियों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, षोडश मातृकाओं की सूची सभी परंपराओं में एक समान नहीं है। इन नामों में कई ऐसे गुणों और धार्मिक भावों का संकेत मिलता है, जिन्हें जीवन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उदाहरण के लिए, मेधा का संबंध बुद्धि और समझ से, धृति का धैर्य से, पुष्टि का पोषण और समृद्धि से तथा शांति का मन की स्थिरता से जोड़ा जाता है। स्वाहा और स्वधा का संबंध वैदिक यज्ञ परंपरा से भी है। इस प्रकार, षोडश मातृका की उपासना में देवी के विविध स्वरूपों और जीवन के अलग-अलग पक्षों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।