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Dussehra 2025: दशहरा के दिन क्यों मुहूर्त देखकर नहीं करते हैं कोई कार्य, क्या होता है अबूझ मुहूर्त?

Thu, 02 Oct 2025 02:55 PM IST
ज्योति मेहरा शैली प्रकाश

सार

प्रतिवर्ष साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त होते हैं। इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी कहते हैं। अबूझ का अर्थ है जिसे समझने या मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती, यानी ये तिथियां अपने आप में ही इतनी शुभ होती हैं कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से....
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दशहरा के दिन क्यों मुहूर्त देखकर नहीं करते हैं कोई कार्य - फोटो : adobe stock
Dussehra 2025: ज्योतिष मान्यता के अनुसार, प्रतिवर्ष साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त होते हैं। इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी कहते हैं। अबूझ का अर्थ है जिसे समझने या मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती, यानी ये तिथियां अपने आप में ही इतनी शुभ होती हैं कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से....
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ज्योतिष के अनुसार हिंदू पंचांग वर्ष में साढ़े तीन ऐसे अबूझ मुहूर्त है जिसमें मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं है क्योंकि संपूर्ण दिन और रात ही इस दिन शुभ मानी गई। जैसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया), विजयादशमी (आश्विन शुक्ल दशमी) और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग। यह दिन बहुत ही शुभ माने गए हैं। 
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ये हैं साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त - फोटो : adobe
ये हैं साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त
  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: यह हिंदू नववर्ष का पहला दिन होता है, जिसे गुड़ी पड़वा भी कहा जाता है। इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया): इसे अखा तीज भी कहते हैं। इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य का फल अक्षय अर्थात कभी समाप्त न होने वाला होता है। माना जाता है कि इस दिन किए गए दान, स्नान, जप, तप का फल अनंत होता है।
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ये हैं साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
  • विजयादशमी (आश्विन शुक्ल दशमी): यह दशहरा का दिन है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन कोई भी नया कार्य या यात्रा शुरू करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग: यह दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का दिन होता है। इसे आधा अबूझ मुहूर्त माना जाता है।

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दशहरा के दिन क्यों मुहूर्त देखकर नहीं करते हैं कोई कार्य - फोटो : freepik
उपरोक्त के अलावा तीन अन्य तिथियों को भी अबूझ माना गया है- 1. देवउठनी एकादशी: जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं, 2. बसंत पंचमी: ज्ञान और सरस्वती पूजा का दिन और 3. फुलेरा दूज (या फुलरिया दूज): होली से पहले का शुभ दिन। 
 
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दशहरा के दिन क्यों मुहूर्त देखकर नहीं करते हैं कोई कार्य - फोटो : freepik
इन मुहूर्त में करते सकते हैं सभी मांगलिक कार्य: इन साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में बिना किसी विशेष मुहूर्त को देखे ही गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत, विद्यारंभ, मुंडन, नई दुकान या व्यवसाय का आरम्भ, वाहन या संपत्ति की खरीदारी और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। माना जाता है कि इन मुहूर्तों में किए गए कार्य सफल होते हैं और उन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है। इस दिन किसी पंडित से या पंचांग में शुभ समय निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। जहां तक सवाल है विवाह का हो तो यह देखना जरूरी है कि इस दिन सूर्य दक्षिणायन न हो, चातुर्मास का समय न हो और शुक्र या गुरु तारा अस्त नहीं होना चाहिए।
शैली प्रकाश


 
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