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Shukrawar Ke Upay: शुक्रवार के दिन करें ये एक काम, आर्थिक समस्याओं का होगा निवारण

Fri, 07 Feb 2025 06:41 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shukrawar Ke Upay: हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी कहा जाता है, उनकी उपासना से साधक के सौंदर्य, सुख-शांति और वैभव में वृद्धि होती हैं। 
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Shukrawar Ke Upay - फोटो : अमर उजाला
Shukrawar Ke Upay: हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी कहा जाता है, उनकी उपासना से साधक के सौंदर्य, सुख-शांति और वैभव में वृद्धि होती हैं। मान्यता है कि यदि रोजाना विधि विधान से मां लक्ष्मी की पूजा की जाए, तो वह प्रसन्न होती हैं और भक्तों के सभी संकटों का निवारण करती हैं। इस दौरान देवी की विशेष कृपा पाने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे शुभ माना गया है। सप्ताह का यह दिन उनकी पूजा-पाठ को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को पूजा पाठ करने से कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती हैं। कहते हैं कि शुक्र ग्रह सुख-समृद्धि, प्रेम, वैवाहिक सुख और भोग-विलास के कारक है। कुंडली में उनकी स्थिति मजबूत होने पर जातक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती हैं। ऐसे में शुक्रवार की पूजा में मां लक्ष्मी की इस चालीसा का पाठ अवश्य करें इससे वह प्रसन्न होती हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं....
 
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ज्योतिषियों की मानें तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर में शंख चढाएं। - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार के दिन करें ये तीन खास उपाय
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा में चांदी के सिक्के को भी शामिल करें। इसके बाद उस सिक्के की भी पूजा करें और उसे पूरे दिन पूजा स्थल पर ही रखे रहने दें। अगले दिन चांदी के सिक्के को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन के किसी स्थान पर रख दें। माना जाता है कि इससे धन लाभ के योग बनते हैं।
  • ज्योतिषियों की मानें तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर में शंख चढाएं। इसके बाद विधिनुसार पूजा करें और घी मखाने का भोग लगाएं। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती हैं।
     
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शुक्रवार के दिन सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें। - फोटो : adobe
  • शुक्रवार के दिन सुबह ही स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें। फिर साफ आसन पर बैठकर मां लक्ष्मी के इस मंत्र का 108 बार जप करें। मान्यता है कि इससे व्यापार में लाभ की संभावनाएं बनती हैं.. मंत्र है- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। 

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श्री लक्ष्मी चालीसा - फोटो : freepik
श्री लक्ष्मी चालीसा

॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥

श्री लक्ष्मी चालीसा
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥1॥

तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥7॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥8॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥9॥

ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥10॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥11॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥12॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥13॥

बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥14॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥15॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥16॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥17॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥18॥

रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥19॥

॥ दोहा॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥
 

 

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लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र - फोटो : freepik
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र
ऊँ महालक्ष्म्यै नमो नमः । ऊँ विष्णुप्रियायै नमो नमः ।।
ऊँ धनप्रदायै नमो नमः । ऊँ विश्वजन्नयै नमो नमः ।।

लक्ष्मी जी का बीज मंत्र
ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम:।।

श्री लक्ष्मी महामंत्र
ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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