हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह दो एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह एकादशी की तिथि एक शुक्ल पक्ष और एक कृष्ण पक्ष में आती है। एकादशी व्रत रखने का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसके अलावा इस एकादशी को हरिशयनी, पद्यनाभा एकादशी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह एकादशी 29 जून, गुरुवार के दिन मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में निद्रा के लिए चल जाते हैं। जिस कारण से सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य इन चार महीने के लिए रुक जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय होती है और एकादशी के दिन भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी के पौधे की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है नहीं तो पूजा में भूल के कारण इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भगवान विष्णु को तुलसी बहुत ही प्रिय होती है इसी कारण से भगवान विष्णु को हरिप्रिया भी कहा जाता है। तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। ऐसे में देवशयनी एकादशी व्रत रखते हुए इस दिन तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसी मान्यता है एकादशी के दिन मां लक्ष्मी भगवान विष्णउ के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में आपको एकादशी के दिन गलती से भी तुलसी के पौधे को जल अर्पित नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे मां लक्ष्मी का निर्जला व्रत खंडित हो जाएगा।
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भगवान विष्णु को एकादशी तिथि और तुलसी बहुत ही प्रिय होती है। मान्यता है जो भी लोग नियमित रूप से तुलसी के पौधे की पूजा करते हैं उनके ऊपर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की ही विशेष कृपा प्राप्ति होती है। इस वजह से एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़ना चाहिए। इस बहुत अशुभ माना जाता है। ऐसे में पूजा के लिए तुलसी के पत्तों को एकादशी के दिन से पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
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तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का रूप होता है। ऐसे में तुलसी के पौधे के आस-पास हमेशा ही साफ-सफाई रखनी चाहिए। मां लक्ष्मी सदैव के लिए उन्हीं घरों में निवास करती है जहां पर साफ-सफाई होती है। ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रसन्न करने के लिए तुलसी के आसपास बिल्कुल भी गंदगी नहीं होनी चाहिए।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर पर तुलसी का पौधा होने से सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जाएं फौरन ही दूर हो जाती है। इस कारण से तुलसी के पौधे के पास हमेशा साफ-सफाई रखनी चाहिए। तुलसी के पौधे के पास कभी भी जूते-चप्पल नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा गंदे और जूठे हाथों से भी तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए।
इस देवशयनी एकादशी पर भगवान चार महीने के लिए क्षीर सागर में निद्रा के लिए चले जाएंगे। ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनकर तुलसी माता की पूजा न करें।