आषाढ़ मास के शुक्ल में पड़ने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह 23 जुलाई, सोमवार को पड़ रही है। इसके साथ ही चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है। कहा जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु 4 माह के लिए पाताल लोक में योगनिद्रा करने चले जाते हैं। जिसके कारण 4 माह तक किसी भी तरह का शुभ कार्य जैसे यज्ञ, विवाह, गोदान आदि पर रोक लगा दी जाती है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी की पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त।
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vishnu
- फोटो : vishnu
देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त: 23 जुलाई शाम 4 बजकर 23 मिनट तक
पारण का समय: 24 जुलाई सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक।
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devyani ekadshi 2018
पूजन विधि
इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। जो लोग व्रत नहीं रख रहे उन्हें भी इस दिन सुबह उठकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले पूजा घर में विष्णु भगवान की तस्वीर पर गंगाजल के छींटे गें और तिलक कर फूल अर्पित करें। इसके बाद देसी घी का दीपक जलाएं और जाने अनजाने में हुई गलतियोंं के लिए प्रार्थना करें और आरती उतारें। पूजा के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराना न भूलें। ऐसा करने से आपका व्रत पूर्ण होता है।
महत्व
शास्त्रों के अनुसार जो श्रद्धालु सच्चे मन से एकादशी का व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा उसके सारे पाप धुल जाते हैं और मृत्यु के बाद उसको मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी की कथा पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान के जितना पुण्य फल प्राप्त होता है।