चाणक्य विद्वान होने के साथ एक योग्य शिक्षक भी थे. कहा जाता है कि उन्होंने प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की थी। बाद में उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षित भी किया। आचार्य चाणक्य के अनुसार बच्चों में शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार होना भी बहुत आवश्यक होता है। जो उसे माता-पिता के द्वारा ही दिए जा सकते हैं बिना संस्कार के शिक्षा का कोई महत्व नहीं रह जाता है।
चाणक्य नीति के अनुसार बच्चों की परवरिश करते समय माता-पिता को बहुत ध्यान देना चाहिए। क्योंकि बच्चों में गलत संगति या आदते बहुत जल्दी आ जाती हैं, जो आगे चलकर भविष्य में स्वयं और माता-पिता के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती हैं। इन खराब आदतों की वजह से पूरा जीवन बर्बाद हो सकता है इसलिए चाणक्य की इन बातों को गांठ बांध लेना चाहिए।