आचार्य चाणक्य
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निंदा रस से रहें दूर
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को निंदा रस से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। स्वयं तो किसी की निंदा करने से बचना ही चाहिए, साथ ही ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए दूसरों की निंदा करते हों क्योंकि निंदा एक ऐसा अवगुण है जिसमें धीरे-धीरे आपको भी आनंद आने लगता है और आप अपने बहुमूल्य समय नष्ट करते हैं। यह अवगुण आपकी असफलता का कारण बनता है। इसलिए न ही किसी की निंदा करनी चाहिए और न ही सुननी चाहिए। ऐसे लोगों से तुरंत दूर बना लेने में ही भलाई है।