दान का महत्व हर धर्म में बताया गया है। सनातन धर्म में सदियों से दान देने की परंपरा का पालन किया जाता है। गुप्त दान (जिसका जिक्र न किया जाए) को सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है। जो दान बिना स्वार्थ के गुप्त रूप से किया जाता है वह बहुत ही पुण्य कारी माना जाता है। इससे व्यक्ति को पापकर्मों का नाश होता है और पुण्य कर्मों में बढ़ोत्तरी होती है। दान करते समय भी कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। दान का अर्थ ये नहीं है कि जो वस्तु आपके काम की न हो यानि उपयोग करने के लायक न हो, उसे दान कर दिया जाए। ऐसा दान मान्य नहीं होता है। दान तन, मन और धन किसी भी तरह से किया जाए, बस निस्वार्थ भाव से किया जाना चाहिए। वैसे तो कभी भी दान किया जा सकता है। पर कुछ समय ऐसा भी होता जिसमें यदि दान किया जाए तो बहुत शुभफलदायी माना जाता है। मान्यता के अनुसार कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका दान यदि प्रतिदिन सुबह किया जाए तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।