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चाणक्य नीति: जब तक शरीर है निरोगी और मृत्यु दूर, समय रहते कर कर लें ये काम

Tue, 02 Mar 2021 11:12 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य केवल धन या किताबी ज्ञान को ही महत्वपूर्ण नहीं मानते हैं बल्कि उनका कहा था कि आत्म संतुष्टि से सच्चा सुख होता है। आत्मिक शांति से बढ़कर मनुष्य के लिए जीवन में कोई सुख नहीं रहता है। व्यक्ति को आत्मिक शांति अच्छे कार्यों को करने से मिलती है। आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को यह जीवन श्रेष्ठ कार्य करने के लिए मिला है। प्रत्येक मनुष्य को अपने मन में दूसरों के प्रति परोपकार की भावना रखनी चाहिए और अपने जीवन में नेक और अच्छे कार्य करने चाहिए। व्यक्ति के द्वारा किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार ही व्यक्ति को याद रखा जाता है। आचार्य चाणक्य ने कुछ ऐसे कार्यों के बारे में बताया है, जिन्हें निरोगी काया रहते हुए कर लेना चाहिए। जानते हैं वे कौन से कार्य हैं।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
अच्छे और समाज हित के कार्य 
आचार्य चाणक्य के अनुसार जीवित रहते ही व्यक्ति को लोक कल्याण के कार्य करते रहना चाहिए। मौका मिलने पर सदैव पुण्य कार्य करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। जब तक आपके शरीर में रोग नहीं हैं तब तक जितना हो सके अच्छे और जनकल्याण के कार्य करने चाहिए। क्योंकि शरीर में रोग लगने की स्थिति और मृत्यु के बाद किसी को पुण्य कार्य करने का मौका नहीं मिलता है। अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति अपने जीवन में तो सम्मान पाते ही हैं ऐसे लोगों को मृत्यु के बाद भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
कल पर न टालें कोई काम 
चाणक्य के अनुसार कहते हैं कि समय रहते हर कार्य को पूर्ण कर लेना ही उचित होता है। आज के कार्य पर कभी कल पर नहीं टालना चाहिए। व्यक्ति का शरीर जब तक चुस्त-दुरूस्त रहे तब तक जितना हो सके अपने कार्यों को पूर्ण कर लेना चाहिए। तभी आपको जीवन में सफलता प्राप्त होती है। जब व्यक्ति के शरीर को रोग लग जाते हैं, तब उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है और वह किसी कार्य को करने की स्थिति में नहीं रहता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
करें दान पुण्य का काम
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने जीवन में बुरे कार्यों और लोभ की भावना से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अपने जीवन में जब तक आपका शरीर निरोगी है तब तक दान पुण्य करते रहना चाहिए। अपने जीवन में कभी भी व्यक्ति को दूसरे के लिए बुरे विचार नहीं लाने चाहिए। अपने मन में सकारात्मक विचार रखने चाहिए। इससे आपकी आत्मा शुद्ध होती है।
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