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Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि पर पाएं पापों से मुक्ति, करें ये उपाय

Tue, 02 Mar 2021 07:03 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Mahashivratri 2021 - फोटो : अमर उजाला
पुण्येन जायते पुत्रः पुण्येन लभते श्रियम् । पुण्येन रोगनाशः स्यात सर्वशास्त्रेण सम्मतः ।।
माता पार्वती को समझाते हुए भगवान शिव कहते हैं, कि प्रियतमे ! पुण्यकर्मो के करने से ही वंश कि वृद्धि होती है, पुण्यकर्म करने से ही जीव कीर्तिवान होता है और इसी पुण्यकर्म में लगे रहने से शरीर के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं, ऐसा सभी शास्त्रों की सम्मति है।
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MahaShivratri 2021 - फोटो : अमर उजाला
वैसे तो प्रत्येक माह की 'मासशिवरात्रि' का एक-एक पल अतिपुण्यफलदायी माना गया है किन्तु, फाल्गुन माह की शिवरात्रि जिसे 'महाशिवरात्रि' कहा गया है उसका फल वर्षपर्यंत सभी शिवरात्रियों से भी अधिक है।  इस दिन सनातन धर्मियों के लिए उनके द्वारा किये गए सभी अशुभ कृत्यों का प्रायश्चित करने का सुनहरा अवसर भी है। शास्त्र कहते हैं कि 'अवश्यमेव भोक्तव्यम् कृते कर्म शुभाशुभं'। अर्थात- मनुष्य को अपने द्वारा किये हुए पाप-पुण्य जनित कर्मो का फल भोगना ही पड़ता है। जीव पाप करके भी तभी तक सुखी रह पाता है जबतक कि उसके द्वारा संचित पुण्यकर्मों का कोष खाली नहीं हो जाता। पुण्यकोष खाली होते पापकर्मो का फल मिलने लगता है, फिर प्राणी इतनी परेशान हो जाता है कि उसे बचने का कोई भी मार्ग दिखाई नहीं देता।
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MAHASHIVRATRI
महाशिवरात्रि इसी पुण्य को पुनः बृद्धि करने का वरदान है। स्वयं भगवान शिव माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित भक्तों को वरदान-आशिर्वाद देने के लिए सभी शिवालयों-शिवलिंगों में विराजते हैं। शिव जब जीव का संहार करते हैं तो महाकाल बन जाते हैं, यही शिव महामृत्युंजय बनकर उसी जीव कि रक्षा भी करते हैं और शंकर बनकर जीव का भरण पोषण भी करते हैं तो रूद्र बनकर महाबिनाश लीला भी करते हैं। स्वयं शिव ही ब्रह्मा और विष्णु के रूप में एकाकार देवो के देव महादेव बन जाते हैं। इन्हीं महादेव को प्रसन्न करने के लिए अच्छे अवसर के रूप में महाशिवरात्रि का पावन पर्व है।

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महाशिवरात्रि - फोटो : amar ujala
शिव की ही ऐसी पूजा है जिसमें केवल 'पत्त्रं-पुष्पं, फलं-तोयं' अर्थात पत्र, पुष्प, फल और जल से करके भी पूर्णफल प्राप्त किया जा सकता है। इसदिन जो भी सामग्री आपके पास हो उसी को लेकर श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की पूजा करें। ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय। मंत्र का जप करते रहें, साथ ही ॐ नमो भगवते रुद्राय, का जप भी कर सकते हैं। इन मंत्रों को जपते हुए बेलपत्र पर चन्दन या अष्टगंध से राम- राम लिख कर शिव पर चढ़ाएं। 
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mahashivratri - फोटो : social media
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले शिवभक्त मंदार पुष्प से, घर में सुख शान्ति चाहने वाले धतूरे के पुष्प अथवा फल से, शत्रुओं पर विजय अथवा मुकदमों में सफलता की इच्छा रखने वाले भक्त भांग से शिव कि पूजा करें, तो सभी तरह के पराजय की संभावनाएं समाप्त हो जाएँगी। संपूर्ण कष्टों और पुनर्जन्मों से मुक्ति चाहने वाले मनुष्य गंगाजल और पंचामृत अर्पण करते हुए 'ॐ नमो भगवते रुद्राय, ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नों रुद्रः प्रचोदयात। इस मंत्र को पढ़ते हुए सभी सामग्री जो भी यथा संभव हो उसे लेकर समर्पण भाव से शिव अर्पित करें। श्रद्धाभाव और विश्वास के साथ जो भी करेंगे महादेव आपकी सभी मनो कामना पूर्ण करेंगे ॐ नमः शिवाय।
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