चाणक्य नीति
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परोपकरणं येषां जागर्ति हृदये सताम। नश्यन्ति विपद्स्तेषां सम्पद: स्यु: पदे पदे।।
आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से बताया है कि जिस मनुष्य के हृदय में हमेशा उपकार करने की भावना बनी रहती है, उसकी सभी विपत्तियां नष्ट हो जाती हैं। ऐसे लोगों को जिंदगी के हर कदम पर धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य के अंदर परोपकार की भावना अवश्य होनी चाहिए। परोपकारी व्यक्ति हमेशा सुख प्राप्त करते हैं। इसके अलावा नीति शास्त्र में अन्य महत्वपूर्ण बातें बताई हैं, जो भी मनुष्य अपने जीवन ने इन बातों को अनुसरण करते हैं, उन्हें कभी भी धन की कमी नहीं होती।