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जानिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नए हिंदू वर्ष को किस नाम से जाना जाएगा?

Wed, 25 Mar 2020 07:44 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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25 मार्च, बुधवार से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर रामनवमी तक मां दूर्गा का पावन पर्व नवरात्रि मनाया जाएगा। इन नौं दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों उपवास का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में शक्ति के नौं रुपों की पूजा करने से सभी तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख, शांति आ जाती है। चैत्र नवरात्रि के आरंभ से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी हो जाती है।अगली स्लाइड्स में जानते हैं घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि कथा और और हिंदू नववर्ष का नाम...


 
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घटस्थापना 
  • नवरात्रि प्रारंभ होते ही घट स्थापना की जाती है। घट स्थापना करने से घर में सकारात्मकता का वास होता है और घर में खुशहाली आ जाती है। घटस्थापना के बाद नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है औक विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। घटस्थापना के बाद ही उपवास का प्रण लेकर उपवास रखे जाते हैं। 

 
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घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
  • 25 मार्च, बुधवार
सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक

 

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पूजा विधि
  • सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें।
  • स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहने।
  • घर के मंदिर में साफ-सफाई करें।
  • मंदिर में साफ-सफाई करने के बाद मंदिर में एक साफ-सुथरी चौकी बिछाएं।
  • गंगाजल छिड़क कर चौकी को पवित्र करना न भूलें।
  • चौकी के समक्ष किसी बर्तन में मिट्टी फैलाकर ज्वार के बीज बो दें।
  • मां दुर्गा की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें और दुर्गा जी का रोली से तिलक करें।
  • नारियल में भी तिलक लगाएं।
  • फूलों का हार दुर्गा जी की प्रतिमा को पहनाएं।
  • कलश स्थापना करने से पहले कलश पर स्वास्तिक अवश्य बना लें। 
  • कलश में जल, अक्षत, सुपारी, रोली एवं मुद्रा (सिक्का) डालें और फिर एक लाल रंग की चुन्नी से लपेट कर रख दें।
 
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हिंदू नववर्ष
  • चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ होते ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो जाती है। इस साल 25 मार्च से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2077 का आगाज हो जाएगा। 
  •  नव संवत 2077 का नाम- प्रमादी

 
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नवरात्रि के दिनों में मां के इन 9 रुपों की पूजा की जाती है
  • पहले दिन देवी शैलपुत्री
  • दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी
  • तीसरी चंद्रघंटा 
  • चौथी कूष्मांडा
  • पांचवी स्कंध माता
  • छठी कात्यायिनी
  • सातवीं कालरात्रि 
  • आठवीं महागौरी
  • नौवीं सिद्धिदात्री।
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