विद्या की देवी
सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का दूसरा आधार विद्या है। ज्ञान, कला, संगीत, गुणों से ही किसी व्यक्ति की समाज में पहचान होती है। उसको यश प्राप्त होता है। और इसकी प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की आराधना जरूरी है। लक्ष्मी अस्थिर हैं, चंचल हैं, लेकिन सरस्वती जी स्थायी हैं, शांत हैं और अपरिवर्तनशील हैं। लक्ष्मीजी धातु हैं और उनको प्राप्त करने की शक्तिप्रदात्री सरस्वती हैं, जो सुर, संगीत, भाषा, विज्ञान, कौशल, विद्या में निहित हैं। देवी सरस्वती का मंत्र है-व्यय (ज्ञान) करो, जितना कर सको। सरस्वती ही अपने ज्ञान से बच्चे को ज्ञान की ओर प्रवृत्त करती हैं। अतः नवरात्र में इस स्वरूप की भी पूजा करें।