आज 24 मार्च को चैत्र अमावस्या है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक यह इस साल का अंतिम दिन है। हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का बड़ा महत्व होता है। पितरों के तर्पण के लिए यह तिथि महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनकी आत्मा की शांति के लिए उपवास एवं पवित्र नदी में स्नान किया जाता है। आज ही के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड का भी विधान है। लेकिन आज के दिन कुछ सावधानियां भी बरतनी आवश्यक है। हालाँकि उससे पहले जानिए चैत्र अमावस्या का शुभ मुहूर्त और इसकी पूजा विधि क्या है।
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चैत्र अमावस्या का शुभ मुहूर्त
चैत्र अमावस्या का शुभ मुहूर्त
सवार्थ सिद्धी योगी - सुबह 6 बजकर 20 मिनट से अगले दिन 4 बजकर 19 मिनट तक।
अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक।
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चैत्र अमावस्या की पूजा विधि
चैत्र अमावस्या की पूजा विधि
चैत्र अमावस्या के दिन प्रातः जल्दी उठें।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, जलाशय या कुंड आदि में स्नान करें।
सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
इस दिन कर्मकांड के साथ अपने पितरों का तर्पण करें।
पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें।
आज के दिन जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
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भूलकर भी न करें ये पांच गलतियां
अमावस्या के दिन तामसिक पदार्थों का सेवन न करें। इस दिन मांस, मछली, शराब अथवा अन्य प्रकार के मादक पदार्थों से का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे व्यक्ति के मन और तन पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए इसका ध्यान रखें।
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अगर सुबह देर तक से सोने की आदत है तो अमावस्या के दिन इस आदत को बदलें। क्योंकि इस दिन देर तक नहीं सोना चाहिए। इससे व्यक्ति के ऊपर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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इस दिन क्रोध, हिंसा एवं अनैतिक कार्य नहीं बनाना चाहिए। बल्कि इस दिन दान पुण्य के कार्य करने चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन करना चाहिए।
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- फोटो : Social media
अमावस्या तिथि पर शारीरिक संबंध नहीं बनना चाहिए। गरुण पुराण के अनुसार अमावस्या पर दैहिक संबंध बनाने से पैदा होने वाली संतान जीवन में कभी भी सुखी नहीं रह पाती है।
अमावस्या के दिन परिवार वालों से वाद-विवाद नहीं चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को ठेस पहुंचती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है।