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Pradosh Vrat 2022: आज है भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत? जानें पूजा विधि और महत्व

Wed, 24 Aug 2022 12:03 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कब है भाद्रपद का पहला प्रदोष व्रत - फोटो : iStock
Pradosh Vrat 2022: देवों के देव महादेव को समर्पित त्रयोदशी तिथि हर माह में दो बार पड़ती है। इस  प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस समय भाद्रपद माह चल रहा है। वहीं भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को इस माह का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त प्रदोष व्रत रखते हैं और शुभ समय में भगवान शिव शंकर की पूजा करते हैं। भादो माह का पहला प्रदोष व्रत 24 अगस्त दिन बुधवार को है। प्रदोष व्रत का नाम वार यानी सप्ताह का दिन के अनुसार होता है। इस बार का प्रदोष व्रत बुधवार पड़ रहा है, इसलिए बुध प्रदोष कहलाएगा। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चलिए जानते हैं प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और संपूर्ण पूजन विधि... 
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बुध प्रदोष व्रत 2022 पूजा मुहूर्त - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत 2022 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 24 अगस्त को सुबह 08 बजकर 30 मिनट से हो रही है। ये तिथि 25 अगस्त को सुबह 10 बजकर 37 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। त्रयोदशी तिथि की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। ऐसे में प्रदोष व्रत की पूजा 24 अगस्त को ही रखा जाएगा। 
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बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि
बुध प्रदोष के दिन प्रातः उठकर स्नानादि करने के बाद शिव जी के सामने दीपक प्रज्वलित कर प्रदोष व्रत का संकल्प लें। संध्या समय शुभ मुहूर्त में पूजन आरंभ करें।

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बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि - फोटो : iStock
गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार पुष्प, भांग, आदि से विधिपूर्वक पूजन करें।
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बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि - फोटो : pixabay
इस दिन शिव जी के साथ माता पार्वती की पूजा जरूर करें और शिव जी की आरती करें। पूजा के स्थान पर ही आसन पर बैठकर मंत्र जाप या शिव चालीसा का पाठ करें।
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प्रदोष व्रत का महत्व - फोटो : iStock
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से रोग, ग्रह दोष, कष्ट, पाप आदि से मुक्ति मिलती है। साथ ही इस व्रत के पुण्य प्रभाव से नि:संतान लोगों को पुत्र भी प्राप्त होता है। शिव जी की कृपा से धन, धान्य, सुख, समृद्धि से जीवन परिपूर्ण होता है। 
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